राजेश बिष्ट नए भारत का उदय
भिवानी। राधास्वामी आश्रम, दिनोद में आयोजित विशाल सत्संग में परमसंत सतगुरु कँवर साहेब जी महाराज ने संत कबीर साहब के शब्द अब मैं भुला रे भाई, मेरे सतगुरु अलख जगाई का आध्यात्मिक सार समझाते हुए कहा कि जीव अनादिकाल से माया, अहंकार, मोह और विषय-विकारों में भटकता रहा है। जब तक पूर्ण सतगुरु की कृपा नहीं होती, तब तक उसे अपने वास्तविक स्वरूप और परमात्मा की पहचान नहीं हो सकती।उन्होंने कहा कि कबीर साहब ने भुला शब्द उस जीव की अवस्था का प्रतीक बताया है जो संसार की क्षणभंगुर वस्तुओं को ही अपना सब कुछ मान बैठा है और अलख जगाई का अर्थ है कि सतगुरु जीव के भीतर उस दिव्य चेतना को जागृत कर देते हैं जिससे उसे सत्य, आत्मा और परमात्मा का बोध होने लगता है। यही मनुष्य जीवन का वास्तविक उद्देश्य है।
परमसंत सतगुरु कँवर साहेब जी महाराज ने कहा कि सतगुरु केवल उपदेश नहीं देते, बल्कि जीवन की दिशा बदल देते हैं। उनकी शरण में आने वाला व्यक्ति धीरे-धीरे काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार से ऊपर उठकर प्रेम, सेवा, विनम्रता और नाम-सुमिरन के मार्ग पर अग्रसर होता है। जब अंतर्मन में प्रभु-प्रेम जागता है, तब संसार के आकर्षण स्वतः फीके पड़ने लगते हैं। उन्होंने साध-संगत को प्रेरित करते हुए कहा कि सत्संग केवल सुनने की वस्तु नहीं, बल्कि जीवन में उतारने का संदेश है। यदि मनुष्य गुरु-वचनों पर चलकर नियमित नाम-सुमिरन, सेवा और सत्संग को अपनाए तो उसका जीवन शांत, संतुलित और सार्थक बन जाता है। मनुष्य गृहस्थ जीवन के समस्त दायित्व निभाते हुए भी परमात्मा की ओर निरंतर बढ़ सकता है।
उन्होंने कहा कि वास्तविक जागृति बाहर नहीं, भीतर होती है। जब सतगुरु अंतःकरण में ज्ञान का दीप प्रज्वलित करते हैं, तभी अज्ञान का अंधकार समाप्त होता है और जीव अपने परम लक्ष्य की ओर बढ़ता है।सत्संग के अंत में परमसंत सतगुरु कँवर साहेब जी महाराज ने सभी श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे मानव जीवन की अमूल्य निधि को व्यर्थ न गंवाएं, बल्कि सेवा, सत्संग, नाम-सुमिरन, सदाचार और गुरु-आज्ञा के पालन को अपने जीवन का आधार बनाकर आत्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करें।इस अवसर पर देश के विभिन्न राज्यों से आए हजारों श्रद्धालुओं ने सत्संग में उपस्थित होकर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया तथा आश्रम में सेवा और भक्ति का वातावरण श्रद्धा एवं उल्लास के साथ व्याप्त रहा।
