राजेश बिष्ट नए भारत का उदय
गयाजी। कानू विकास संघ, गया के अध्यक्ष शंकर कुमार कानू ने कहा कि प्रदेश अध्यक्ष के आग्रह पर वे पटना में आयोजित कानू-हलवाई रैली में शामिल हुए। उन्होंने बताया कि समाज के कई बुजुर्गों एवं अभिभावकों ने उन्हें रैली में जाने से मना किया था, लेकिन वे स्वयं वहां की वास्तविक स्थिति जानने के उद्देश्य से गए।
शंकर कुमार कानू ने दावा किया कि रैली में उन्होंने महसूस किया कि कानू समाज का उपयोग केवल भीड़ जुटाने के लिए किया जा रहा था तथा मुख्यमंत्री के समक्ष हलवाई समाज का बहुमत प्रदर्शित करने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि मंच से उन्हें बोलने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया, फिर भी उन्होंने स्पष्ट रूप से अपनी बात रखते हुए कहा कि कानू और हलवाई दो अलग-अलग समाज हैं तथा दोनों का विलय उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा मंच से कानू और हलवाई समाज को एक साथ जोड़ने की घोषणा किए जाने का उन्होंने मंच पर तथा बाद में मीडिया के समक्ष भी विरोध किया। उनका कहना है कि कानू समाज के अधिकारों के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
शंकर कुमार कानू ने कहा कि यदि आवश्यकता पड़ी तो कानू समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए सड़क से लेकर सदन तक आंदोलन, धरना, घेराव एवं चक्का जाम जैसे लोकतांत्रिक माध्यमों से संघर्ष किया जाएगा। उन्होंने बिहार के कानू समाज से एकजुट होकर इस लड़ाई में साथ देने की अपील की।
उन्होंने यह भी कहा कि जल्द ही मुख्यमंत्री से मिलकर समाज की पांच प्रमुख मांगों का ज्ञापन सौंपा जाएगा। साथ ही उन्होंने दावा किया कि कानू समाज की जनसंख्या लगभग 30 लाख तथा हलवाई समाज की जनसंख्या लगभग 6 लाख है। अंत में उन्होंने समाज की एकता बनाए रखने का आह्वान करते हुए कहा, “जय बाबा कंगाली बघौत।”
