राजेश बिष्ट नए भारत का उदय
भिवानी। श्री हरिकृष्ण ध्याइए, जिस डिठे सब दुःख जाए के पावन संदेश के साथ आठवें गुरु हरकिशन साहिब का प्रकाश पर्व गुरुद्वारा पुरानी देवसर चुंगी में श्रद्धा और धूमधाम के साथ मनाया गया। इस अवसर पर गुरुद्वारा साहिब में संगत ने गुरु साहिब के चरणों में शीश नवाकर सुख-शांति की अरदास की। समागम के दौरान श्री सुखमनी साहिब के पाठ का भोग डाला गया। इसके बाद भाई गुरबचन सिंह ने गुरबाणी शब्द-कीर्तन के माध्यम से संगत को निहाल किया। उन्होंने गुरु हरकिशन साहिब के जीवन, मानवता की सेवा और जरूरतमंदों की सहायता के लिए उनके द्वारा किए गए कार्यों पर प्रकाश डाला।

गुरु हरकिशन साहिब को उनकी मानव सेवा और रोगियों की सेवा के लिए विशेष रूप से याद किया जाता है। सिख परंपरा में उन्हें करुणा, सेवा और परोपकार की मिसाल माना जाता है। दिल्ली में चेचक और हैजे जैसी बीमारियों से पीड़ित लोगों की सेवा करने के कारण उनके जीवन से जुड़ी यह स्मृति विशेष रूप से श्रद्धा का केंद्र है।
समागम के अंत में अरदास की गई और संगत के लिए गुरु का अटूट लंगर बरताया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने लंगर प्रसाद ग्रहण किया। इस अवसर पर प्रधान प्रेम मुटरेजा, बलदेव सिंह, ज्ञानी प्रेम सिंह, गुलशन चानना, रमन गावड़ी, सुदेश सिंह , विशाल मुटरेजा, जतिन, गगनीश चावला, दयासिंह, विजय सनेजा, बलविंदर सिंह मिंटू, करनेल सिंह बागड़ी, गुरशरण सिंह, महेंद्र सिंह, खरेतीलाल बत्रा और नवदीप कौर, पूजा सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
