राजेश बिष्ट नए भारत का उदय
भिवानी। भिवानी में थैलसीमिया से पीडि़त बच्चों के जीवन को संबल देने के लिए मानवता का एक अनूठा और प्रेरणादायक उदाहरण देखने को मिला। जिले के समर्पित और जागरूक रक्तदाताओं ने एक बार फिर समाज के सामने सेवा और समर्पण की मिसाल पेश करते हुए थैलसीमिया ग्रस्त बच्चों के लिए स्वैच्छिक रक्तदान किया।
इस अवसर पर एडवोकेट मुकेश गुलिया ने 38वीं बार रक्तदान कर समाज सेवा के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता को दोहराया, वहीं शतकवीर रक्तदाता राजेश डुडेजा ने अपने जीवन का 148वां रक्तदान कर एक ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम की। इन दोनों रक्तदाताओं का यह अनुकरणीय कदम यह साबित करता है कि नियमित रक्तदान से न केवल जरूरतमंदों की जिंदगी बचाई जा सकती है, बल्कि समाज में सकारात्मकता और संवेदना का संदेश भी प्रसारित होता है। इस प्रेरणादायक आयोजन को सफल बनाने में चिकित्सा और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े समर्पित कर्मियों का भी विशेष योगदान रहा।
इस अवसर पर डा. रोहित महला, स्टॉफ नर्स ममता, लैब टेक्निशियन प्रदीप, नवीन कुमार की देखरेख और सहयोग से रक्तदान शिविर अत्यंत सुव्यवस्थित और सुरक्षित तरीके से संपन्न हुआ।
इस मौके पर एडवोकेट मुकेश गुलिया व शतकवीर रक्तदाता राजेश डुडेजा ने कहा कि थैलसीमिया एक आनुवंशिक बीमारी है, जिससे ग्रस्त बच्चों को अपने जीवन की रक्षा के लिए बार-बार रक्त की आवश्यकता होती है। ऐसे में नियमित रक्तदाताओं का आगे आना इन बच्चों के लिए वरदान साबित होता है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के मानवीय प्रयास न केवल थैलसीमिया पीडि़तों के परिवारों का हौसला बढ़ाते हैं, बल्कि समाज में एक स्वैच्छिक रक्तदान संस्कृति को मजबूत करने का कार्य करते हैं। भिवानी की यह पहल अन्य जिलों और लोगों को भी संकट के समय जरूरतमंदों की मदद के लिए आगे आने को प्रेरित करती है।
