राष्ट्रीय लोक अदालत से पहले 7 मई को प्री-लोक अदालत का आयोजन, लंबित मामलों के समाधान पर रहेगा फोकस

राजेश बिष्ट नए भारत का उदय

भिवानी। जिला में आगामी द्वितीय राष्ट्रीय लोक अदालत के सफल एवं प्रभावी आयोजन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से 7 मई को प्री-लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा। यह आयोजन एडीआर (वैकल्पिक विवाद समाधान) सेंटर परिसर में किया जाएगा, जहां विभिन्न प्रकार के लंबित मामलों की समीक्षा कर उन्हें आपसी सहमति के आधार पर निपटाने का प्रयास किया जाएगा।

स्थायी लोक अदालत भिवानी की सदस्य सुमन बजाड़ ने जानकारी देते हुए बताया कि प्री-लोक अदालत का मुख्य उद्देश्य उन मामलों की पहचान करना है, जिन्हें सुलह एवं समझौते के माध्यम से आसानी से निपटाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस पहल से न केवल मुख्य राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान मामलों के निस्तारण की प्रक्रिया तेज होगी, बल्कि न्याय व्यवस्था को अधिक सरल, सुलभ और प्रभावी बनाने में भी मदद मिलेगी।

उन्होंने बताया कि प्री-लोक अदालत के दौरान संबंधित पक्षों को बुलाकर उन्हें समझौते के लिए प्रेरित किया जाएगा। साथ ही उन्हें यह भी बताया जाएगा कि आपसी सहमति से विवाद सुलझाने के क्या-क्या लाभ हैं। इससे न्यायालयों में लंबित मामलों का बोझ कम होगा और पक्षकारों को शीघ्र न्याय मिल सकेगा।

स्थायी लोक अदालत सदस्य सुमन बजाड़ ने कहा कि आज के समय में न्यायालयों में मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है, ऐसे में लोक अदालत और प्री-लोक अदालत जैसे वैकल्पिक मंच अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इन मंचों के माध्यम से लोग बिना किसी लंबी कानूनी प्रक्रिया में उलझे अपने विवादों का समाधान कर सकते हैं।

उन्होंने बताया कि प्री-लोक अदालत में विशेष रूप से ऐसे मामलों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिनमें आपसी सहमति की संभावना अधिक होती है। इनमें बैंक ऋण विवाद, टेलीफोन बिल आदि शामिल हैं। इन मामलों को सौहार्दपूर्ण वातावरण में बैठाकर सुलझाने का प्रयास किया जाएगा।

प्री-लोक अदालत के आयोजन से पहले संबंधित विभागों एवं पक्षकारों को सूचित किया जाएगा, ताकि वे निर्धारित तिथि पर उपस्थित होकर अपने मामलों का समाधान करवा सकें। इसके लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा व्यापक स्तर पर जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है, जिससे अधिक से अधिक लोग इस पहल का लाभ उठा सकें।

स्थायी लोक अदालत सदस्य सुमन बजाड़ ने कहा कि प्री-लोक अदालत एक ऐसा मंच है जहां न तो किसी पक्ष की हार होती है और न ही जीत, बल्कि दोनों पक्ष आपसी सहमति से समाधान निकालते हैं। इससे रिश्तों में कड़वाहट भी कम होती है और सामाजिक सौहार्द बना रहता है।

उन्होंने आमजन से अपील करते हुए कहा कि जिन लोगों के मामले न्यायालयों में लंबित हैं, वे इस अवसर का अधिक से अधिक लाभ उठाएं और प्री-लोक अदालत में पहुंचकर अपने मामलों का समाधान करवाएं। उन्होंने कहा कि यह एक सरल, सस्ता और त्वरित न्याय पाने का माध्यम है, जिसे अपनाकर लोग समय और धन दोनों की बचत कर सकते हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत के सफल आयोजन के लिए यह प्री-लोक अदालत एक महत्वपूर्ण कदम है, जो मामलों के पूर्व निस्तारण में सहायक सिद्ध होगी। इससे मुख्य लोक अदालत में अधिक संख्या में मामलों का समाधान संभव हो पाएगा।

उन्होंने कहा कि न्याय को आमजन तक सुलभ बनाने के लिए इस प्रकार की पहलें अत्यंत आवश्यक हैं और सभी नागरिकों का सहयोग इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण का प्रयास है कि हर व्यक्ति को समय पर और सुलभ न्याय मिल सके, और इसी दिशा में यह प्री-लोक अदालत एक प्रभावी कदम साबित होगी।

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