राजेश बिष्ट

भिवानी। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय, दिव्य भवन, रूद्रा कॉलोनी, भिवानी की ओर से शिवरात्रि महोत्सव की श्रृंखला के अंतर्गत हनुमान गेट, बैकुंठ धाम के पास एक आध्यात्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बीके रजनी दीदी ने शिव और शंकर के वास्तविक स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सामान्यतः लोग शिव और शंकर को एक ही समझ लेते हैं, जबकि दोनों में महान अंतर है।

उन्होंने बताया कि मंदिरों में शंकर की प्रतिमा एक देहधारी रूप में दिखाई जाती है, जिनके गले में सांपों की माला होती है और जटाओं से गंगा बहती हुई दर्शाई जाती है, जबकि शिव की प्रतिमा को ज्योतिर्लिंग के रूप में स्थापित किया जाता है। ज्योतिर्लिंग पर बनी तीन लकीरें ब्रह्मा, विष्णु और शंकर की रचना का प्रतीक हैं, जो क्रमशः सृष्टि की स्थापना, पालन और विनाश का कार्य करते हैं। वहीं बीच में स्थित बिंदु परमपिता परमात्मा शिव का वास्तविक स्वरूप है।

बीके रजनी दीदी ने कहा कि मंदिरों में शंकर जी को सदैव ज्योतिर्लिंग का ध्यान करते हुए दिखाया जाता है। यदि शिव और शंकर एक ही होते, तो शंकर स्वयं का ध्यान क्यों करते? इससे यह सिद्ध होता है कि शिव और शंकर अलग-अलग हैं। शिव रचयिता हैं और शंकर उनकी रचना हैं। शिव परमपूज्य, सर्वश्रेष्ठ एवं निराकार हैं, जबकि शंकर सूक्ष्म शरीरधारी हैं। इस आध्यात्मिक सत्य को एक लघु नाटिका के माध्यम से भी प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए अनेक आध्यात्मिक रहस्यों को भी उजागर किया गया।इस अवसर पर शिव ध्वजारोहण किया गया तथा उपस्थित जनसमूह को नशा छोड़ने की शपथ भी दिलाई गई। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि महंत चरणदास, पार्षद जयवीर रंगा एवं नर्सिंग ऑफिसर भारती प्रजापति ने सभी को शिव जयंती की शुभकामनाएं दीं।

जिला प्रवक्ता विनोद चावला ने ब्रह्माकुमारी संस्था के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि यह संस्था समाज को आंतरिक एवं आध्यात्मिक रूप से सशक्त बनाने का महत्वपूर्ण कार्य कर रही है।कार्यक्रम में बीके कमल, मीडिया प्रभारी बीके सुभाष गोयल, बीके पूनम, बीके मोहित, बीके रूद्रांशी, बीके संतोष सहित अनेक बीके भाई-बहन एवं प्रभु प्रेमी उपस्थित रहे।
