राजेश बिष्ट / नए भारत का उदय

कमर्शियल सिलेंडर की किल्लत से चूल्हे ठंडे, ब्लैक मार्केटिंग का खेल शुरू : अनिरूद्ध चौधरी
भिवानी। हरियाणा सहित आसपास के इलाकों में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की भारी किल्लत ने आम जनजीवन और व्यापार की कमर तोड़ दी है। स्थिति इतनी विकराल हो चुकी है कि अब इसका असर केवल होटलों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अस्पतालों के बाहर लगने वाले भंडारे और खिलाडिय़ों के हॉस्टल तक पहुंच गया है। सबसे दुखद तस्वीर माता मनसा देवी न्यू भंडारा हॉल से सामने आई है, जो पूरी तरह बंद हो चुका है। यहाँ से संचालित होने वाली 14 मोबाइल वैन पहिए थम गए हैं। ये वैन रोजाना पीजीआई चंडीगढ़, सेक्टर-32, सेक्टर-16 और पंचकूला सेक्टर-6 जैसे बड़े अस्पतालों में करीब 7 हजार लोगों को मुफ्त भोजन पहुंचाती थीं।
सिलेंडर न होने के कारण अब इन मरीजों के तीमारदारों और गरीबों के सामने भोजन का संकट खड़ा हो गया है। वही हॉस्टल में रह रहे खिलाडिय़ों के लिए भी खाना बनाना मुश्किल हो गया है। अब मजबूरी में घरेलू सिलेंडरों का जुगाड़ किया जा रहा है, जो कि अवैध और असुरक्षित है। संकट का फायदा उठाकर कालाबाजारी करने वाले सक्रिय हो गए हैं। जो सिलेंडर सामान्य दरों पर मिलता था, वह अब 3 हजार तक में ब्लैक में बेचा जा रहा है। इस संकट पर गहरा रोष व्यक्त करते हुए कांग्रेस ग्रामीण जिला अध्यक्ष अनिरुद्ध चौधरी ने सरकार और प्रशासन को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने कहा कि यह बेहद शर्मनाक है कि सरकार की नाक के नीचे कालाबाजारी फल-फूल रही है और प्रशासन मौन है।
उन्होंने कहा कि जब अस्पतालों के बाहर भंडारे बंद हो रहे हैं और खिलाडिय़ों को भूखा रहना पड़ रहा है, तो मुख्यमंत्री और स्थानीय विधायक कहाँ हैं। कमर्शियल सिलेंडर की कमी अचानक पैदा नहीं हुई, यह प्रशासनिक कुप्रबंधन और मिलीभगत का नतीजा है। अनिरूद्ध ने कहा कि 3 हजार रूपये में सिलेंडर बिकना साबित करता है कि सप्लाई चेन को जानबूझकर रोका गया है, ताकि आम जनता और व्यापारियों को लूटा जा सके। वही विश्वविद्यालय के हॉस्टल और स्टेडियम जैसे सरकारी संस्थानों में सिलेंडर न होना सरकार की प्राथमिकताएं दर्शाता है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि अगले 24 घंटों में सप्लाई सामान्य नहीं हुई और कालाबाजारी पर लगाम नहीं कसी गई, तो कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर सडक़ों पर उतरने को मजबूर होगी।
