
कप्तान बिसानिया की टीम ने हरियाणवी संस्कृति को बढ़ाया : हनुमान कौशिक
भिवानी। हरियाणवी लोक संस्कृति और परंपराओं को देशभर में पहचान दिलाने की दिशा में कलाकार लगातार अपनी कला के माध्यम से महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। इसी कड़ी में चंडीगढ़ के कलाग्राम मनीमाजरा में संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के निर्देशानुसार उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र पटियाला द्वारा आयोजित चार दिवसीय रागनी उत्सव में संस्कृति गौरव अवार्डी कप्तान बिसानिया की टीम ने अपनी प्रभावशाली प्रस्तुति देकर हरियाणवी संस्कृति का परचम लहराया।

12 से 15 मार्च तक आयोजित इस भव्य सांस्कृतिक उत्सव में विभिन्न राज्यों के लोक कलाकारों ने भाग लिया, जहां हरियाणा की ओर से कप्तान बिसानिया और उनकी टीम ने हरियाणवी रागनी, लोकगीत और पारंपरिक प्रस्तुति से दर्शकों का मन मोह लिया। कलाकारों की दमदार प्रस्तुति को दर्शकों और आयोजकों ने खूब सराहा।

म्हारी संस्कृति म्हारा स्वाभिमान संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष हनुमान कौशिक ने कप्तान बिसानिया व उनकी पूरी टीम को इस उपलब्धि के लिए बधाई देते हुए कहा कि कलाकार ही समाज की संस्कृति और परंपराओं के सच्चे वाहक होते हैं। उन्होंने कहा कि एक सच्चा कलाकार अपनी कला के माध्यम से समाज को जोड़ने का कार्य करता है और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
हनुमान कौशिक ने कहा कि आज के आधुनिक दौर में जहां युवा पीढ़ी तेजी से पश्चिमी संस्कृति की ओर आकर्षित हो रही है, वहीं ऐसे लोक कलाकार अपनी कला के माध्यम से उन्हें अपनी परंपराओं, संस्कारों और सांस्कृतिक विरासत से परिचित करवा रहे हैं। यह कार्य समाज और संस्कृति के संरक्षण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि हरियाणा की रागनी परंपरा सदियों पुरानी है और यह केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं बल्कि समाज को शिक्षा देने और सामाजिक संदेश पहुंचाने का सशक्त माध्यम भी रही है। रागनी के माध्यम से समाज में भाईचारा, नैतिकता, देशभक्ति और सामाजिक जागरूकता का संदेश दिया जाता रहा है।
कप्तान बिसानिया की टीम ने उत्सव के दौरान हरियाणवी रागनियों की ऐसी प्रस्तुति दी कि दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। उनकी प्रस्तुति में हरियाणा की लोक बोली, संस्कृति, परंपराएं और ग्रामीण जीवन की झलक साफ दिखाई दी। कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में उपस्थित दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।
इस अवसर पर कप्तान बिसानिया ने कहा कि हरियाणवी संस्कृति और लोक परंपराओं को आगे बढ़ाना उनका उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि रागनी केवल एक कला नहीं बल्कि हरियाणा की पहचान है और इसे जीवित रखना हर कलाकार का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि जब भी उन्हें इस प्रकार के मंच मिलते हैं, तो वह पूरी निष्ठा के साथ हरियाणा की संस्कृति को प्रस्तुत करने का प्रयास करते हैं।
उन्होंने आयोजन के लिए संस्कृति मंत्रालय और उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र पटियाला का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच प्रदान करते हैं और लोक संस्कृति को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में मददगार साबित होते हैं। कार्यक्रम में विभिन्न सांस्कृतिक संगठनों के प्रतिनिधियों और कलाकारों ने भी भाग लिया। सभी ने कप्तान बिसानिया की टीम की प्रस्तुति की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन से देश की विविध संस्कृतियों को एक मंच पर देखने का अवसर मिलता है और आपसी सांस्कृतिक आदान-प्रदान भी बढ़ता है।
म्हारी संस्कृति म्हारा स्वाभिमान संगठन के पदाधिकारियों ने भी कलाकारों का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि हरियाणा की संस्कृति अत्यंत समृद्ध और गौरवशाली है। इसे संरक्षित रखना और नई पीढ़ी तक पहुंचाना समाज के प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है।कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने कलाकारों का सम्मान भी किया और भविष्य में भी इसी प्रकार संस्कृति के संरक्षण के लिए कार्य करते रहने की अपील की। इस अवसर पर संगठन के अनेक सदस्य एवं सांस्कृतिक प्रेमी उपस्थित रहे, जिन्होंने कलाकारों का अभिनंदन करते हुए कहा कि हरियाणा की संस्कृति को राष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाने के लिए ऐसे कलाकारों का योगदान अत्यंत सराहनीय है।
