यशवीर सिंह नए भारत का उदय

प्रदर्शनी में आकर्षण का केंद्र बनी हस्तशिल्प कला
भिवानी। एमएसएमई स्थानीय कार्यालय की सहायक निदेशक एवं प्रभारी रचना त्रिपाठी ने बताया कि प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के तहत हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड सामने चौ. बंसीलाल विश्वविद्यालय के पुराने कैंपस वीरवार से आयोजित तीन दिवसीय हस्तशिल्प प्रदर्शनी-मेले का मुख्य उद्देश्य कारीगरों और शिल्पकारों को उनके उत्पाद बेचने का एक मंच प्रदान करना है। मेले में कारीगरों व शिल्पकारों की हस्तशिल्प कला आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। प्रदर्शनी में स्कूल-कॉलेज व के अलावा चौ. बंसीलाल विश्वविद्यालय के विद्यार्थी भी प्रदर्शनी को देखने में खूब रुचि ले रहे हैं। शनिवार शाम को प्रदर्शनी का समापन होगा। समापन पर शाम करीब तीन बजे चौ. बंसीलाल विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. दीप्ति धर्माणी मुख्य अतिथि होंगी।

सहायक निदेशक एवं प्रभारी रचना त्रिपाठी ने बताया कि अपना कार्य शुरु करने के लिए शुरुआत में एक लाख रुपए का ऋण लिया जा सकता है। ऋण लेने के बाद छह महीने का प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण के बाद ऋण राशि को बढाकर दो लाख रुपए का किया जा सकता है। ब्याज दर पांच प्रतिशत रहती है।

वहीं दूसरी ओर प्रदर्शनी में जिला सोनीपत के गांव जटिया निवासी अनौखी शर्मा की लगी हैंडमेड आभूषणों की स्टॉल अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बनी है। अनौखी का हैंडमेड क्राफ्ट के क्षेत्र में कार्य कर रही हैं और वह राधे-राधे स्पेशल हेल्प ग्रुप से जुड़ी हुई हैं। उन्हें इस समूह से जुड़े हुए लगभग आठ वर्ष हो चुके हैं। अनौखी शर्मा हस्तकला के माध्यम से हाथों से ज्वेलरी मटरमाला, कंठी, गलसरी, मंगलसूत्र, बोरला, नजरिये व हरियाणा व राजस्थान की संस्कृति को दर्शाने वाली मोतियों की माला-आभूषण तैयार करती हैं। उन्होंने अपने इस काम की शुरुआत सरकारी योजना के तहत प्राप्त 10 हजार रुपये के स्टार्टअप लोन से की थी।
आज वे अन्य महिलाओं को भी हस्तकला का प्रशिक्षण दे रही हैं। वे हिमाचल प्रदेश, पंजाब, राजस्थान, पंचकूला और चंडीगढ़ में आयोजित होने वाले मेलों और प्रदर्शनियों में भाग लेकर अपने उत्पादों का प्रदर्शन कर चुकी हैं। अनौखी शर्मा अब तक लगभग 100 से 200 महिलाओं को अपने इस अभियान से जोड़ चुकी हैं और उन्हें आत्मनिर्भर बनने की दिशा में प्रेरित कर रही हैं।
नरेश और सतबीर ने देसी उत्पादों से बनाई पहचान
प्रदर्शनी में लगी एक देशी उत्पाद की स्टाल पर नरेश कुमार ने बताया कि वह वर्ष 2022 से देसी और पारंपरिक उत्पादों का निर्माण कर रहे हैं। वे लगभग 60 प्रकार के अचार, 8 प्रकार की चटनियां और 15 प्रकार के मुरब्बे तैयार करते हैं। इसके साथ ही वे गुड़ और खांड से बने उत्पाद, हल्दी की खेती, आंवला कैंडी और आंवला के लड्डू भी बनाते हैं, जिन्हें लोगों द्वारा काफी पसंद किया जा रहा है। नरेश कुमार के साथ काम करने वाले वाले सतबीर गोरैया शहद उत्पादन का कार्य करते हैं। उन्होंने बताया कि उनके द्वारा 8 से 10 प्रकार का शहद तैयार किया जाता है, जो ग्राहकों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र है।
नरेश कुमार गुरु रविदास सेल्फ हेल्प ग्रुप से जुड़े हुए हैं। उन्होंने अपने व्यवसाय की शुरुआत 30 हजार रुपये के ऋण से की थी, जो सरकारी सहायता से बढक़र अब दो लाख रुपये तक पहुंच चुका है। उनके समूह के साथ 10 महिलाएं भी जुड़ी हुई हैं, जिन्हें इस कार्य से रोजगार मिल रहा है। बढ़ती मांग को देखते हुए उनके उत्पादों की 2–3 फ्रेंचाइजी भी शुरू की जा चुकी हैं। नरेश कुमार की मेहनत और नवाचार को कई मंचों पर सम्मान भी मिल चुका है।
उन्हें 8 फरवरी को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जा चुका है। वर्ष 2026 में आयोजित कृषि एवं किसान मेले में भी उनके देसी उत्पादों के लिए उन्हें सम्मान मिला। इसके अलावा राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) तथा खादी और ग्रामोद्योग आयोग द्वारा भी उन्हें विशेष रूप से सम्मानित किया गया है। उनके स्वयं सहायता समूह को आगे बढ़ाने में कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. नरेंद्र कुमार द्वारा लगातार मार्गदर्शन और प्रोत्साहन दिया जा रहा है।
