सिद्धि धाम में राजयोगिनियों ने बताया नवरात्रि का आध्यात्मिक महत्व, जीवन में अष्ट शक्तियां धारण करने का संदेश

राजेश बिष्ट नए भारत का उदय

नवरात्र के उपलक्ष्य में आध्यात्मिक संगोष्ठी का आयोजन

भिवानी। चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर प्रजापिता ब्रह्माकुमारीज की शाखा सिद्धि धाम में एक भव्य आध्यात्मिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी में कोसली से पधारी राजयोगिनी बी.के. निर्मला बहन ने उपस्थित श्रद्धालुओं को नवरात्रि के गूढ़ आध्यात्मिक रहस्यों से अवगत कराया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ब्रह्मावत्स, मातृशक्ति एवं स्थानीय श्रद्धालुओं ने भाग लिया और आध्यात्मिक ज्ञान का लाभ उठाया।

राजयोगिनी बी.के. निर्मला बहन ने अपने उद्बोधन में कहा कि नवरात्र केवल बाहरी उत्सव नहीं, बल्कि आत्मा को जागृत करने का एक विशेष अवसर है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार हम नवरात्र में अखंड ज्योति जलाते हैं, उसी प्रकार हमें अपने भीतर की दिव्य आत्मिक ज्योति को भी प्रज्वलित करना चाहिए। यह ज्योति हमारे अंदर सकारात्मकता, शांति और शक्ति का संचार करती है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि व्रत का वास्तविक अर्थ केवल भोजन त्यागना नहीं, बल्कि जीवन में पवित्रता को अपनाना है। यदि हम सच्चे मन से पवित्रता का व्रत धारण करें, तो हमारा जीवन सुखमय और सफल बन सकता है।

उन्होंने आगे कहा कि देवी स्वरूपों में जो दिव्यता, सहनशीलता, सरलता और प्रसन्नता दिखाई जाती है, वह केवल पूजा का विषय नहीं, बल्कि जीवन में अपनाने योग्य गुण हैं। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में इन गुणों को अपनाकर व्यक्ति अपने जीवन को संतुलित और खुशहाल बना सकता है। उन्होंने उपस्थित महिलाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि हर नारी में देवी स्वरूप विद्यमान है, बस उसे पहचानने और जागृत करने की आवश्यकता है।

इस अवसर पर राजयोगिनी बी.के. सुमित्रा बहन ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने बताया कि देवियों की अष्टभुजाएं वास्तव में अष्ट शक्तियों का प्रतीक हैं। ये शक्तियां सहनशक्ति, सामना करने की शक्ति, परखने की शक्ति, निर्णय शक्ति, सहयोग शक्ति, समेटने की शक्ति, सहनशीलता और विस्तार को संकुचित करने की शक्ति। यदि व्यक्ति इन आठों शक्तियों को अपने जीवन में धारण कर ले, तो वह हर परिस्थिति में सफल हो सकता है। बी.के. सुमित्रा बहन ने कहा कि आज की नारी केवल परिवार की जिम्मेदारी नहीं निभा रही, बल्कि वह समाज के हर क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रही है। उन्होंने नारी को अन्नपूर्णा और सरस्वती का स्वरूप बताते हुए कहा कि वह अपने परिवार का पालन-पोषण करने के साथ-साथ बच्चों को संस्कार और शिक्षा भी प्रदान करती है। इसलिए नारी को अपनी शक्ति को पहचानकर आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ना चाहिए।

संगोष्ठी के दौरान आध्यात्मिक वातावरण अत्यंत शांत और ऊर्जावान बना रहा। उपस्थित श्रद्धालुओं ने राजयोग ध्यान का अभ्यास भी किया, जिससे उन्हें मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव हुआ। कार्यक्रम में भक्ति गीतों और आध्यात्मिक संदेशों के माध्यम से भी नवरात्रि के महत्व को समझाया गया।इस अवसर पर बी.के. शारदा, बी.के. कविता, बी.के. पूनम, नीलम, सुशील, सुनील, राजेश, मनोज, बी.के. महेश, बी.के. भीम सिंह चौहान तथा मीडिया कोऑर्डिनेटर बी.के. धर्मबीर सहित अनेक ब्रह्मावत्स उपस्थित रहे। सभी ने संगोष्ठी को सफल बनाने में सक्रिय भूमिका निभाई। कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थितजनों को नवरात्रि के पावन अवसर पर आत्मिक उन्नति और सकारात्मक जीवन जीने का संदेश दिया गया। आयोजकों ने बताया कि इस प्रकार के आध्यात्मिक कार्यक्रम समय-समय पर आयोजित किए जाते रहेंगे, ताकि अधिक से अधिक लोग आध्यात्मिक ज्ञान से जुड़ सकें और अपने जीवन को श्रेष्ठ बना सकें।

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