राजेश विष्ट / विरेन्द्र सिंह (मिंटू) नए भारत का उदय

भजन-कीर्तन में झूमे श्रद्धालु, महिला संकीर्तन मंडली ने किया गुणगान
भिवानी। न्यू विद्या नगर स्थित मां नंदा देवी मंदिर में चैत्र माह के पावन नवरात्र पर्व के अवसर पर श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत माहौल देखने को मिला। इस अवसर पर मां के भक्तों द्वारा मां नंदा देवी की महिमा का गुणगान किया गया तथा मंदिर परिसर जयकारों से गूंज उठा।कार्यक्रम के दौरान महिला संकीर्तन मंडली द्वारा भजन-कीर्तन प्रस्तुत किया गया। “जै-जै बोला जै भगवती नंदा, नंदा ऊंचा कैलाश की व…” और “तू रेंदी तू रेंदी मां ऊंचा पहाड़ों मा…” जैसे भजनों पर श्रद्धालु भाव-विभोर होकर झूम उठे।
मंदिर के पुजारी पदमा दत्त एवं श्रद्धालु मंगत सिंह ने बताया कि मां नंदा देवी उत्तराखंड की प्रमुख लोकदेवी और शक्ति स्वरूपा मानी जाती हैं। कुमाऊं और गढ़वाल क्षेत्र में उनकी विशेष आस्था है और उन्हें मां पार्वती का ही स्वरूप माना जाता है।उन्होंने बताया कि मां नंदा देवी को “नंदा राजराजेश्वरी” के नाम से भी जाना जाता है और उन्हें हिमालय की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। “नंदा” का अर्थ आनंद देने वाली होता है, इसलिए भक्त उन्हें सुख-समृद्धि की देवी के रूप में पूजते हैं।
यशोदा रावत, बबीता रावत व कविता सनवाल ने बताया दी कि उत्तराखंड स्थित नंदा देवी पर्वत का नाम भी मां के नाम पर रखा गया है, जिसे देवी का निवास स्थान माना जाता है। वहीं, हर 12 वर्षों में आयोजित होने वाली प्रसिद्ध नंदा देवी राजजात यात्रा भी मां को समर्पित होती है, जिसे “हिमालय की कुंभ यात्रा” कहा जाता है। नवरात्र के दौरान भक्तजन व्रत रखकर, भजन-कीर्तन कर और पूजा-अर्चना के माध्यम से मां से सुख-शांति की कामना करते हैं। श्रद्धालुओं का मानना है कि मां नंदा देवी केवल देवी ही नहीं, बल्कि उत्तराखंड की संस्कृति, परंपरा और आस्था का प्रतीक हैं, जिन्हें बेटी, बहन और मां तीनों रूपों में पूजा जाता है। इस अवसर पर मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और पूरे वातावरण में भक्तिमय ऊर्जा का संचार होता रहा।
