राजेश बिष्ट नए भारत का उदय

लोकगीतों, रागनियों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से गूंजा मंच, कलाकारों ने बिखेरा हरियाणा की परंपरा का रंग
हिसार। हरियाणा कला परिषद मंडल के तत्वावधान में “म्हारी संस्कृति म्हारा स्वाभिमान” संगठन के सानिध्य में एक भव्य हरियाणवी सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन अग्रोहा मोड़, हिसार में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष हनुमान कौशिक ने की। इस अवसर पर क्षेत्र के गणमान्य व्यक्तियों, संस्कृति प्रेमियों और बड़ी संख्या में दर्शकों की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ा दिया। कार्यक्रम का मंच संचालन धर्मवीर नागर द्वारा प्रभावशाली ढंग से किया गया, जिन्होंने पूरे आयोजन को सुचारु रूप से आगे बढ़ाते हुए दर्शकों को अंत तक बांधे रखा।

कार्यक्रम के दौरान अध्यक्ष हनुमान कौशिक ने अपने संबोधन में हरियाणवी संस्कृति के मूल्यों और उसकी विशेषताओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हरियाणा की संस्कृति अपनी सादगी, वीरता, लोक परंपराओं और उच्च जीवन मूल्यों के लिए देशभर में जानी जाती है। यहां की रागनी, लोकगीत, बोली और परंपराएं केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने और संस्कारों को संजोने का सशक्त माध्यम भी हैं।

उन्होंने आगे कहा कि वर्तमान समय में तेजी से बदलती जीवनशैली के बीच अपनी सांस्कृतिक जड़ों को बचाए रखना अत्यंत आवश्यक हो गया है। उन्होंने कहा कि “हमारी संस्कृति ही हमारी पहचान है और यदि हम इसे नहीं बचा पाए, तो आने वाली पीढ़ियां अपने मूल से कट जाएंगी,”।
हनुमान कौशिक ने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि हर व्यक्ति का दायित्व है कि वह अपनी संस्कृति और संस्कारों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाए। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे अपने बच्चों और विशेषकर तीसरी पीढ़ी तक इन मूल्यों को अवश्य हस्तांतरित करें, ताकि हमारी सांस्कृतिक विरासत सदैव जीवित रहे।
उन्होंने संगठन “म्हारी संस्कृति म्हारा स्वाभिमान” के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह संगठन हरियाणवी संस्कृति, लोक कला, रागनी परंपरा और सामाजिक मूल्यों के संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। संगठन समय-समय पर ऐसे सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन कर समाज में जागरूकता फैलाने, युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने और सामाजिक एकता को मजबूत करने का कार्य करता है।
कार्यक्रम की सबसे खास बात रही हरियाणा के प्रसिद्ध लोक कलाकारों की शानदार प्रस्तुतियां, जिन्होंने अपने सुरों और कला के माध्यम से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रसिद्ध कलाकार अशोक मिर्ची ने अपनी रागनी से मंच पर ऐसा समां बांधा कि दर्शक तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठे। वहीं जींद की डॉ. सुशीला जांगड़ा ने अपनी मधुर आवाज में लोकगीत प्रस्तुत कर श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया।
हाँसी की मीना शर्मा और हिसार के सुदेश ने भी अपनी प्रस्तुतियों से कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। इन कलाकारों की रागनियों और लोकगीतों ने हरियाणा की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा को जीवंत कर दिया। दर्शकों ने पूरे उत्साह के साथ कलाकारों का स्वागत किया और उनकी प्रस्तुतियों का भरपूर आनंद लिया। कई बार तालियों और हूटिंग के साथ कलाकारों को पुनः प्रस्तुति देने के लिए भी आमंत्रित किया गया।
इस भव्य आयोजन में हरियाणवी लोक संस्कृति, परंपरा और कला की अद्भुत झलक देखने को मिली। रंग-बिरंगे परिधानों, पारंपरिक संगीत और लोक प्रस्तुतियों ने पूरे वातावरण को सांस्कृतिक रंग में रंग दिया। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने इस आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम समाज में सांस्कृतिक चेतना जागृत करने के साथ-साथ नई पीढ़ी को अपनी विरासत से जोड़ने का कार्य करते हैं। इस अवसर ने न केवल मनोरंजन प्रदान किया, बल्कि लोगों के मन में अपनी संस्कृति के प्रति गर्व और सम्मान की भावना को भी और अधिक प्रबल किया।
