राजेश बिष्ट नए भारत का उदय

किन्नर समाज ने भिवानी से शुरू की अनूठी पहल
⏩ ढोल-नंगाड़ों के बीच गूंजी ममता, भिवानी के किन्नर आश्रम में नवजात का कुआं पूजन आयोजित
⏩ अब किन्नर बच्चों को नहीं सहना पड़ेगा शोषण, भिवानी का किन्नर समाज करेगा अच्छी परवरिश : महंत बुलबुल
⏩ किन्नर बच्चों को समाज की मुख्यधारा से जोडक़र सफल और संस्कारवान नागरिक बनाना है उद्देश्य : महंत बुलबुल
⏩ किन्नर बच्चों को तिरस्कार की दृष्टि से देखने वाली संकीर्ण सोच पर है समाज का तमाचा : महंत बुलबुल
भिवानी। अक्सर समाज के हाशिए पर रहने वाले किन्नर समुदाय ने भिवानी की धरती से एक ऐसी मिसाल पेश की है, जिसने ममता और स्वीकार्यता की नई परिभाषा गढ़ी है। वीरवार को शहर की गलियां उस समय खुशियों से सराबोर हो गईं, जब किन्नर समाज ने एक 5 दिन के नवजात बच्चे का, सवा महीने का होने पर पूरे विधि-विधान के साथ कुआं पूजन किया। यह उत्सव केवल एक परंपरा का निर्वहन नहीं था, बल्कि उन संकीर्ण विचारधाराओं को करारा जवाब था जो किन्नर बच्चों को तिरस्कार की दृष्टि से देखते हैं। गौरतलब होगा कि किन्नर बच्चें का पहली बार कुआ पूजन कार्यक्रम भिवानी ही नहीं, अपितु हरियाणा प्रदेश में आयोजित किया गया, जो सराहनीय शुरूआत भिवानी से हुई।

कार्यक्रम का नेतृत्व किन्नर समाज की महंत बुलबुल ने किया। जीतू वाला जोहड़ स्थित किन्नर समाज आश्रम से शुरू हुआ यह उत्सव ढोल-नंगाड़ों की थाप और मंगल गीतों के साथ कृष्णा कॉलोनी स्थित स्वर्ग आश्रम तक पहुंचा। नाचते-गाते समुदाय के सदस्यों ने यह संदेश दिया कि हर बच्चा ईश्वर का रूप है और उसका स्वागत उसी भव्यता से होना चाहिए जैसा किसी भी अन्य बच्चे का होता है। इस दौरान आश्रम में हवन एवं नामकरण कार्यक्रम का भी आयोजन हुआ।

इस मौके पर महंत बुलबुल ने समाज की कड़वी सच्चाई को साझा करते हुए कहा कि अक्सर देखा जाता है कि किन्नर बच्चे के जन्म लेते ही उसके प्रति समाज और परिवार की विचारधारा संकीर्ण हो जाती है। कई बार तो जन्म से ही उनका शोषण शुरू हो जाता है। हमने भिवानी से एक मुहिम शुरू की है कि यदि किसी के घर किन्नर बच्चा पैदा होता है, तो उसे लावारिस छोडऩे या प्रताडि़त करने के बजाय हमें सौंप दें। हम उसका पालन-पोषण अपनी संतान की तरह करेंगे।

महंत बुलबुल ने कहा कि आश्रम केवल इन बच्चों को छत ही नहीं दे रहा, बल्कि उनके भविष्य की नींव भी रख रहा है। महंत ने बताया कि आश्रम में रह रहे बच्चों को बेहतर शिक्षा और संस्कार दिए जा रहे हैं। लक्ष्य साफ है, इन बच्चों को समाज की मुख्यधारा से जोडऩा ताकि वे भविष्य में एक सफल और संस्कारवान नागरिक बन सकें। बच्चों की रुचि के अनुसार उन्हें उनके सपनों को उड़ान देने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

गौरतलब होगा कि कुआं पूजन जैसी रस्में आमतौर पर पुत्र जन्म पर प्रमुखता से देखी जाती थीं, लेकिन किन्नर बच्चे के लिए इसका आयोजन समानता का प्रतीक है। भिवानी के किन्नर समाज की यह संवेदनशीलता बताती है कि परिवार खून से नहीं, बल्कि प्यार और स्वीकार्यता से बनता है। इस अवसर पर नवजात को महंत खुशी, तनीषा, तेजशिया, काजल, सोना, मन्नत, मीनाक्षी, रेखा, रचना, रेशमा सहित सभी महंतों ने अपना अर्शीवाद दिया।
