राजेश बिष्ट नए भारत का उदय

भिवानी। हरियाणा की राजनीति में अपनी मजबूत आर्थिक उपस्थिति दर्ज कराने वाला पंजाबी समाज क्या राजनीतिक रूप से हाशिए पर जा रहा है। यह सवाल एक बार फिर चर्चा में है। समस्त पंजाबी खत्री सभा के पूर्व राष्ट्रीय विस्तारक सुरेश अरोड़ा ने समाज को आगाह करते हुए कहा है कि पूर्व में जातिगत जनगणना को गंभीरता से ना लेना समाज की राजनीतिक कमजोरी का मुख्य कारण बना है।
सुरेश अरोड़ा के अनुसार किसी भी लोकतंत्र में संख्या बल ही सत्ता की कुंजी होती है। पंजाबी समाज ने हमेशा विकास और व्यापार पर ध्यान केंद्रित किया, लेकिन अपनी सांख्यिकीय पहचान को लेकर उदासीन रहा। सटीक आंकड़े ना होने के कारण टिकट वितरण से लेकर महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णयों में समाज की अनदेखी होती रही है। सही जानकारी न होने से समाज के जरूरतमंद तबके को वह लाभ नहीं मिल पाया, जिसके वे हकदार थे।
उन्होंने सरकार द्वारा शुरू की गई वर्ष 2027 की जातिगत जनगणना के फैसले का स्वागत करते हुए इसे पंजाबी समाज के लिए एक टर्निंग पॉइंट बताया है। उन्होंने समाज से अपील की है कि इस बार कोई चूक न हो तथा जातिगत जनगणना में जाति खत्री व भाषा पंजाबी ही भरे। सुरेश अरोड़ा ने कहा कि पिछले एक वर्ष से हमारी सभा लगातार इस मांग को उठा रही थी। अब जब सरकार ने इसे स्वीकार किया है, तो समाज के प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है कि वह जनगणना में अपनी सही पहचान और जानकारी दर्ज कराए, जिसमें जाति के कॉलम में खत्री तथा भाषा के कॉलम में पंजाबी ही भरे।
उन्होंने कहा कि समाज की वास्तविक आबादी का पता चलने से राजनीतिक दलों पर उचित प्रतिनिधित्व देने का दबाव बनेगा। वही विभिन्न उप-जातियों की वास्तविक स्थिति जानकर सरकार ऐसी नीतियां बना सकेगी जो असमानता को कम करें। इसके अलावा वे परिवार जो आर्थिक रूप से पिछड़ गए हैं, उन्हें सरकारी डेटा में शामिल कर मुख्यधारा में लाया जा सकेगा।
सुरेश अरोड़ा ने स्पष्ट किया कि केवल जनगणना होना काफी नहीं है, बल्कि समाज के भीतर जागरूकता पैदा करना अनिवार्य है। अरोड़ा विकास मंच अब गांव-गांव और शहर-शहर जाकर लोगों को शिक्षित करेगी कि जनगणना के फॉर्म भरते समय विशेष रूप से जाति खत्री व भाषा पंजाबी भरे।
