राजेश बिष्ट नए भारत का उदय

भारतीय उद्योगों को उबारने के लिए लोन मोरेटोरियम की तैयारी, सीआईआई ने उठाई राहत की मांग
गुरूग्राम। पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध के बादलों और तनावपूर्ण स्थिति ने भारतीय औद्योगिक गलियारों में चिंता की लहर पैदा कर दी है। कच्चे माल की आसमान छूती कीमतों और लॉजिस्टिक्स में आ रही बाधाओं के बीच अब वित्त मंत्रालय और भारतीय रिजर्व बैंक उद्योगों, विशेषकर एमएसएमई और निर्यातकों को 3 से 6 महीने का लोन मोरेटोरियम देने के प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं।
सीआईआई हरियाणा काउंसिल के वरिष्ठ सदस्य व कैपेरो मारुति के सीईओ विनोद बापना ने मौजूदा स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उनके अनुसार वैश्विक अनिश्चितता के इस दौर में छोटे और मध्यम उद्योग सबसे ज्यादा असुरक्षित हैं।
बापना ने कहा कि मिडल ईस्ट में जारी तनाव के कारण न केवल ऊर्जा की कीमतें बढ़ी हैं, बल्कि कच्चे माल की उपलब्धता और उनकी लागत में भी भारी उछाल आया है। ऐसे में एमएसएमई के सामने कैश-फ्लो का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। सरकार को चाहिए कि वह ब्याज दरों में रियायत दे और लोन की किस्तों पर अस्थायी रोक लगाकर उन्हें इस कठिन दौर से निकलने में मदद करे।
उन्होंने कहा कि लाल सागर संकट और युद्ध के कारण समुद्री मार्ग प्रभावित हुए हैं, जिससे निर्यातकों का माल समय पर नहीं पहुंच पा रहा और माल ढुलाई की लागत कई गुना बढ़ गई है।
वही कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने उत्पादन लागत को बढ़ा दिया है, जिससे छोटे उद्योगों का मुनाफा खत्म हो रहा है। इसके अलावा भुगतान में देरी और बढ़ती लागत के कारण उद्योगों के पास दैनिक कार्यों के लिए नकदी की कमी हो गई है।
ऐसे में वे सरकार से मांग करते है कि 3 से 6 महीने तक ईएमआई पर रोक लगाई जाए विशेष रूप से मुख्य रूप से एमएसएमई, निर्यातक और संकटग्रस्त मैन्युफैक्चरिंग इकाइयोंं पर, वर्किंग कैपिटल लोन पर ब्याज दर में 2-3 प्रतिशत की अतिरिक्त छूट दी जाए, एनपीए (नॉन प्रफोर्मिंग ऐसट्स ) नियमों में ढील दी जाए।
विनोद बापना का मानना है कि यदि सरकार समय रहते हस्तक्षेप नहीं करती है, तो कई छोटी इकाइयां बंद होने के कगार पर पहुंच सकती हैं। उद्योगों ने मांग की है कि बढ़ी हुई कीमतों के प्रभाव को कम करने के लिए इनपुट टैक्स क्रेडिट या प्रत्यक्ष रियायत दी जाए तथा निर्यातकों के लिए शिपिंग लागत में सरकारी मदद बढ़ाई जाए।
उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था के इंजन को सुरक्षित रखने के लिए एक मजबूत आर्थिक सुरक्षा कवच की तत्काल आवश्यकता है।
