राजेश बिष्ट नए भारत का उदय
भिवानी। टी आई टी भिवानी और एम एस एम ई निदेशालय हरियाणा सरकार के बीच रेज़िंग एंड एक्सेलरेटिंग एमएसएमई परफॉर्मेंस (रैम्प) कार्यक्रम के अंतर्गत तकनीकी वस्त्र के क्षेत्र में जागरूकता कार्यशालाओं एवं व्यवसाय-विशिष्ट प्रशिक्षण कार्यक्रमों के आयोजन हेतु एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओए) पर हस्ताक्षर हुए हैं। यह एमओए 1 अप्रैल 2026 को एमएसएमई हरियाणा के महानिदेशक कार्यालय में संपन्न हुआ, जिसमें यश गर्ग, महानिदेशक, एमएसएमई हरियाणा एवं प्रो. बी. के. बेहेरा, निदेशक, टीआईटी एंड साइंसेज, भिवानी ने अधिकृत रूप से हस्ताक्षर किए।

इस समझौते का मुख्य उद्देश्य हरियाणा राज्य के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के बीच तकनीकी वस्त्रों के क्षेत्र में उद्यमिता को बढ़ावा देना तथा उन्हें आधुनिक तकनीकी ज्ञान एवं व्यावसायिक कौशल से सशक्त बनाना है। इसके अंतर्गत जागरूकता कार्यशालाओं, एमएसएमई कॉन्क्लेव तथा व्यवसाय-विशिष्ट प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से उद्योगों को वित्तीय, विपणन, विधिक एवं नियामक पहलुओं की समग्र जानकारी प्रदान की जाएगी।
प्रारंभिक चरण में ये कार्यशालाएं भिवानी, पानीपत एवं गुरुग्राम में आयोजित की जाएंगी, जिससे एमएसएमई इकाइयों को व्यवसाय विकास, विशेषज्ञता एवं नवीन अवसरों से जोड़ने में सहायता मिलेगी। साथ ही, इन कार्यक्रमों के माध्यम से केंद्र एवं राज्य सरकार की नवीनतम योजनाओं, डिस्ट्रिक्ट एमएसएमई बिजनेस डेवलपमेंट सर्विसेज (बीडीएस) हेल्पडेस्क तथा गिफ्ट सेल के लाभों के बारे में भी जागरूकता फैलाई जाएगी।
इस अवसर पर महानिदेशक यश गर्ग ने कहा कि “हरियाणा में एमएसएमई क्षेत्र राज्य की आर्थिक प्रगति का एक सशक्त आधार है। तकनीकी वस्त्र जैसे उभरते क्षेत्रों में इस प्रकार की पहल न केवल उद्योगों को नई दिशा देगी, बल्कि रोजगार सृजन एवं वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भी राज्य को सशक्त बनाएगी। रैम्प कार्यक्रम के अंतर्गत इस सहयोग से एमएसएमई इकाइयों को अत्याधुनिक ज्ञान एवं संसाधनों तक पहुंच सुनिश्चित होगी।
वहीं, टीआईटी, भिवानी के निदेशक प्रो. बी. के. बेहेरा ने कहा कि “यह समझौता संस्थान एवं उद्योग के बीच एक सशक्त सेतु का कार्य करेगा। तकनीकी वस्त्र क्षेत्र भारत का एक उभरता हुआ ‘सनराइज सेक्टर’ है, जिसमें अपार संभावनाएं हैं। इस पहल के माध्यम से हम एमएसएमई इकाइयों को तकनीकी दक्षता, नवाचार एवं व्यावसायिक उत्कृष्टता की दिशा में मार्गदर्शन प्रदान करेंगे, जिससे वे राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन सकें।
उल्लेखनीय है कि भारत का तकनीकी वस्त्र उद्योग वर्तमान में लगभग 22–28 अरब अमेरिकी डॉलर के मूल्य का है तथा 8–10 प्रतिशत की वार्षिक दर से तेजी से बढ़ रहा है। यह क्षेत्र बुनियादी ढांचे के विकास, विशेष सामग्री की बढ़ती मांग एवं सरकारी समर्थन के कारण निरंतर विस्तार कर रहा है, जिससे स्थानीय विनिर्माण एवं निर्यात को भी बढ़ावा मिल रहा है। इस समझौता ज्ञापन के हस्ताक्षरित होने के दौरान टी आई टी भिवानी के प्राध्यापक डॉ नगेन्द्र सिंह तथा एमएस एमई निदेशालय के अन्य अधिकारीगण उपस्थित रहे।
