गैर मान्यता प्राप्त आयुष्मान मल्टीसेपेशलिटी हॉस्पिटल रोहतक रोड़ भिवानी की बड़ी लापरवाही बिना हर्निया के ऑपरेशन किए चीरफाड़ मरीज की जान जोखिम में परेशानी और दर्द अब भी बरकरार

 राजेश बिष्ट / नए भारत का उदय 

ओमप्रकाश भुक्कल बोले, अगर जिंदल हॉस्पिटल हिसार नहीं जाता तो मेरी मौत निश्चित थी
भिवानी। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग नई दिल्ली, सीएम विण्डो, स्वास्थ्य मंत्री आरती राव, सांसद धर्मबीर सिंह, एससी आयोग, सीएमओ डा. रघुबीर शांडिल्य को स्थानीय सैक्टर 13 निवासी शिकायत पत्र सौंपते हुए आबकारी एवं कराधान विभाग से सेवानिवृत व रिटायर्ड कर्मचारी वेलफेयर एसोसिएशन हरियाणा के राज्य प्रेस प्रवक्ता ओमप्रकाश भुक्कल ने बताया कि उसे खांसी, जुखाम व बुखार की शिकायत थी जिसके इलाज के लिए वह 13 जनवरी को रोहतक रोड़ एमसी कालोनी मोड़ स्थित आयुष्मान मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल में गया था। उन्होंने फोन के माध्यम से ही अपना नंबर लगवा लिया था और ओपीडी फीस भी दी थी। लेकिन जब वह जांच के लिए अस्पाल के चिकित्सक डा. नितेश गोयल के पास जाने लगा तो वहां काउंटर पर बैठी स्टाफ महिला ने कहा कि अभी आपका नंबर नहीं आया है अगर आपको डाक्टर से जल्दी मिलना है तो इमरजेंसी फीस लगेगी।

शिकायतकत्र्ता ओमप्रकाश भुक्कल ने बताया कि उनकी तबीयत ज्यादा खराब थी इसलिए उन्होंने इमरजेंसी फीस 350 रूपये अदा की। उसके बाद डाक्टर गोयल ने कहा कि क्या आप सरकारी कर्मचारी हैं तो उन्होंने बता दिया कि वे रिटायर कर्मचारी हैं उसके बाद उन्होंने उनकी कैटेगरी भी पुछी जिसमें उन्होंने बताया कि वे चमार जाती से संबंध रखते हैं। जब उन्होंने डाक्टर से पुछा की क्या आपका अस्पताल हरियाणा सरकार के पैनल पर है तो डाक्टर ने कहा कि हां है। उन्होंने इसके बारे में आबाकारी एवं कराधान विभाग के कर्मचारियों से पता किया तो यह पता चला कि यह अस्पताल हरियाणा सरकार के पैनल पर नहीं है।

डा. नितेश गोयल ने एक पर्ची बनाकर दी और कहा कि टैस्ट के लिए महम रोड़ स्थित नीलकंठ अल्ट्रासाउण्ड पर जाकर तेज-तेज खांस पर टैस्ट करवाना होगा। उसके बाद नीलकंड वाले ने डा. नितेश गोयल से  मिली भगत करके उनसे इमरजेंसी फीस ली और कहा कि आपको दोनों तरफ हरनिया है और प्रोस्टेटर की समस्या भी है। जब वह टैस्ट करवाकर दौबारा से अस्पताल पहुंचा तो वहां काउंटर पर बैठी लडक़ी ने कहा कि आप साइड वाले कमरे में डा. अजय से मिल लो।

डा. अजय ने कहा कि आपको दोनों  तरफ हरनिया हे आपको तुरंत ऑपरेट करना होगा। गौरतलब है कि उन्हें उस समय हरनिया के कोई लक्ष्ण नहीं थे। उन्होंने कहा कि वे परिजनों से विचार विमर्श करके अन्य जगह पर भी टैस्ट करवाना चाहूंगा इसके साथ-साथ एमआरआई व नैनोस्कोपी भी करवाउंगा। यदि उन्हें बीमारी हुई तो वे इसका इलाज हिसार जिंदल अस्पताल में करवाएंगे। इस पर डा. अजय ने कहा कि आप जिंदल में इलाज करवाएंगे तो वहां पर आपको 2 लाख रूपये लग जाएंगे और यहां पर सारा इलाज 60 हजार रूपये में कर देंगे। इस पर उन्होंने सीधे-सीधे कहा कि वे उनकी छुट्टी कर दें। 14 जनवरी को उन्होंने अपने बेटे अमित व दामाद सोमबीर को बोल दिया कि यहां से छुट्टी लेकर हिसार चलेंगे वे गाड़ी लेने के लिए घर चले गए। इसके बाद अस्पताल के कर्मचारियों द्वारा यह कहकर उन्हें नीचे लगाया गया कि एकबार मशीन में चैक करेंगे और वहां पर बिना उन्हें बताए उनके हस्ताक्षर भी करवा लिए और उन्हें ऑपरेशन रूप में ले गए।

वहां पर मौजूद डा. अजय, डा. राजीव, डा. हिमांशु तंवर व अन्य कर्मचारियों ने जबर्दस्ती एक इंजेक्शन लगा दिया। जिससे वे बेहोश हो गए। जब उनका बेटा अमित व दामाद सोमबीर गाड़ी लेकर अस्पताल में पहुंचे तब तक उनका ऑपरेशन कर दिया। उन्होंने डा. अजय से पुछा तो उन्होंने बताया कि कदम अस्पताल से डाक्टर हिमांशु तंवर को बुलाकर ऑपरेशन करवाया है। डाक्टर हिमांशु तंवर ने कहा कि उनकी आंत का ऑपेरशन किया है और कहा कि जब मैंने चैक किया तो हरनिया नहीं मिला। उन्हें 17 जनवरी तक वहीं रखा गया हर रोज नए-नए टैस्ट किए गए उसके बाद उन्हें घर भेज दिया गया।  उसके बाद भी उनकी परेशानी कम होने की बजाए बढ़ रही थी।

उन्हें बहुत तेज दर्द हो रहा था वे 19 जनवरी को वापस अस्पताल पहुंचे तो उन्हें आयुष्मान के  तहत दौबार एडमिट कर लिया और 20 जनवरी तक रखा। उसके बाद उसकी तबीय ज्यादा बिगडऩे लगी तब उसके दामाद सोमबीर व पुत्र अमित उन्हें जिंदल अस्पताल लेकर गए तक तक उनसे लगभग 85 हजार रूपये का बिल बना दिया था। उसके बाद उन्होंने अपना ईलाज जिंदल अस्पताल में करवाया जहां पर लगभग 1 लाख 7 हजार रूपये लगे। उन्होंने कहा कि अगर वे समय पर जिंदल अस्पताल नहीं पहुंचने तो उनका बचना संभव नहीं था। उन्होंने मांग करते हुए कहा कि उक्त अस्पताल को सिल किया जाए तथा आरोपित सभी चिकित्सकों व कर्मचारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए ताकि वे आगे भी किसी व्यक्ति के जीवन से खिलवाड़ न कर सकें। उन्होंने कहा कि लोग चिकित्सकों को भगवान मानते हैं लेकिन ये चिकित्सक को दानवों से भी बढक़र हैं। 

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