राजेश बिष्ट नए भारत का उदय
कांग्रेस ने महिलाओं को आरक्षण दिलाने के नाम पर केवल किया दिखावा
भिवानी। हाल ही में संसद में विपक्ष ने “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” बिल को पास नहीं होने दिया और ऐसा करके सभी विपक्षी पार्टियों ने महिलाओं के अधिकारों के रास्ते में रोड़े अटकाने का कार्य किया है। अभी तक कांग्रेस ने महिलाओं को आरक्षण दिलाने के नाम पर केवल दिखावा किया है। उक्त शब्द भाजपा के पूर्व प्रदेश सह मीडिया प्रमुख रीतिक वधवा ने संसद में विपक्ष ने “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” बिल को पास नहीं होने देने पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहे।

उन्होंने कहा कि गत 16 व 17 अप्रैल को देश की सर्वोच्च पंचायत में विपक्ष ने “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” बिल का विरोध करके हमारी बहन-बेटियों के हक पर डाका डाला है। लोकतंत्र के मंदिर, संसद में जो कुछ भी हुआ, वह न केवल अलोकतांत्रिक था, बल्कि हमारे देश की आधी आबादी के भविष्य पर एक बड़ा प्रहार था। इस प्रकरण ने कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, टी.एम. सी. और डी.एम.के. जैसे विपक्षी दलों का असली चेहरा देश के सामने उजागर कर दिया है।
उन्होंने कहा कि इन दलों ने एक बार फिर साबित कर दिया कि जब बात महिलाओं को अधिकार देने की आती है, तो उनका असली चरित्र महिला-विरोधी और सत्ता का लोभी हो जाता है। यह महिलाओं को उनका संवैधानिक अधिकार दिलाने का ऐतिहासिक अवसर था, लेकिन विपक्ष ने इस अवसर को भी अपनी संकीर्ण राजनीति की भेंट चढ़ा दिया।
उन्होंने कहा कि गत 16 अप्रैल 2026 को केंद्र सरकार ने लोकसभा में तीन क्रांतिकारी विधेयक पेश किए थे। संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, परिसीमन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक । इन विधेयकों को लाने के पीछे केंद्र सरकार का संकल्प बहुत स्पष्ट था। नारी शक्ति वंदन अधिनियम के अनुसार, महिला आरक्षण 2026 के बाद होने वाली जनगणना और परिसीमन के बाद लागू होना था। केन्द्र सरकार जानती थी कि यदि हम जनगणना और लंबी परिसीमन प्रक्रिया का इंतजार करते, तो हमारी बहनों को 2029 के आम चुनाव में भी 33 प्रतिशत आरक्षण का लाभ नहीं मिल पाता।
इसीलिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने यह साहसिक निर्णय लिया कि इस आरक्षण को जनगणना की शर्त से अलग किया जाए, ताकि वर्ष 2029 के आम चुनावों में ही हमारी महिला शक्ति संसद में अपनी प्रभावी उपस्थिति दर्ज करा सके। उन्होंने बताया कि मोदी ने स्पष्ट कहा कि महिलाओं की भागीदारी कोई दया नहीं, उनका अधिकार है। लेकिन कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने एक बार फिर महिलाओं के अधिकारों के रास्ते में रोड़े अटकाने का काम किया है। यह देश की आधी आबादी के साथ विश्वासघात था।
उन्होंने कहा कि आखिर विपक्ष महिलाओं के आरक्षण से इतना डर क्यों रहा है? उत्तर स्पष्ट है कि ये दल जानते हैं कि जिस दिन देश की महिलाओं को उनका पूरा राजनीतिक अधिकार मिल गया, उसी दिन इनकी परिवारवाद की राजनीति खत्म हो जाएगी। महिलाओं के सशक्तिकरण से सबसे बड़ा खतरा उन दलों को है, जिन्होंने दशकों तक महिलाओं को केवल वोट बैंक समझा, लेकिन नेतृत्व का अधिकार नहीं दिया।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने वर्षों तक महिला आरक्षण के नाम पर केवल दिखावा किया। समितियां बनाई, बहाने बनाए, लेकिन कभी महिलाओं को उनका अधिकार नहीं दिया। दूसरी ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम लाकर महिलाओं को सम्मान दिया। लेकिन जब उसे लागू करने की घड़ी आई, तब विपक्ष का असली महिला विरोधी चेहरा सामने आ गया। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने परिसीमन के नाम पर झूठ और भ्रम फैलाया, कहा गया कि इससे कुछ राज्यों को नुकसान होगा। लेकिन गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में तथ्यों के साथ स्पष्ट कर दिया कि किसी भी राज्य का प्रतिनिधित्व कम नहीं होगा। सीटों में समान वृद्धि होगी, सभी राज्यों का संतुलन बना रहेगा। फिर भी विपक्षी नेता लगातार झूठ बोलते रहे, क्योंकि उनका उद्देश्य महिलाओं को अधिकार देना नहीं, बल्कि स्वार्थ की राजनीति करना है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 1971 में जब हमारी आबादी 54 करोड़ थी, तब लोकसभा की सीटें 550 तय की गई थीं। आज हम 140 करोड़ हैं। इसलिए, यह आवश्यक है कि लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 की जाए ताकि हर नागरिक का सही प्रतिनिधित्व हो सके। इसको लेकर विपक्ष ने एक और झूठ फैलाया कि इससे दक्षिण भारत के राज्यों को नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का मॉडल सभी राज्यों में समान रूप से 50 प्रतिशत सीटों की वृद्धि का था। उदाहरण के तौर पर, दक्षिण भारतीय राज्यों की वर्तमान हिस्सेदारी 23.76 प्रतिशत है, जो इस नए मॉडल में बढ़कर 23. 87 प्रतिशत हो जाती। तमिलनाडु की सीटें 39 से बढ़कर 59 और कर्नाटक की 28 से बढ़कर 42 होने वाली थीं। यानी किसी भी राज्य का हक छीनने का नहीं, बल्कि सबका हक बढ़ाने का यह प्रस्ताव था।
लेकिन कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, टी.एम.सी. और डी.एम.के. ने इन विधेयकों का विरोध करके यह सिद्ध कर दिया है कि वे केवल महिलाओं के कल्याण का ढोंग करते हैं। समाजवादी पार्टी ने धर्म आधारित आरक्षण की असंवैधानिक मांग उठाकर केवल मामले को भटकाने का काम किया है, जबकि हमारा संविधान धर्म के आधार पर आरक्षण की अनुमति नहीं देता। विपक्ष जानता है कि अगर बहस असली मुद्दे पर हुई, तो देश की महिलाएं पूछेंगी कि इतने वर्षों तक उन्हें अधिकार क्यों नहीं दिया गया, इसलिए मुद्दे भटकाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेसी नेता जो शाहबानो मामले में महिलाओं के खिलाफ खड़े थे और जिन्होंने दशकों तक महिला आरक्षण को तकनीकी बहानों और फाइलों में दबाकर रखा, वे आज भी वही साजिश दोहरा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि जब भारत आजाद हुआ, उसी समय कई अन्य देश भी आजाद हुए थे। लेकिन कुछ देश विकसित बन चुके हैं, और भारत को उस मुकाम तक पहुंचने में दशकों लग गए। इस देरी का कारण क्या था कांग्रेस की नकारात्मक और विकास-विरोधी राजनीति। इनकी राजनीति का मूलमंत्र रहा है- ‘अटकाओ, लटकाओ व भटकाओ।” शुरू से ही इन्होंने हर उस निर्णय का विरोध किया, जो देश को आगे ले जाने वाला था।
उन्होंने कहा कि जब महिलाओं के सम्मान के लिए तीन तलाक कानून लाया गया, जब धारा 370 को हटाकर देश को एकीकृत किया गया, जब समान नागरिक संहिता पर चर्चा हुई, जब ‘वन नेशन, वन इलेक्शन की बात आई,जब मतदाता सूची को शुद्ध करने की बात हुई, जब केन्द्रीय वक्फ कौंसिल में सुधार की चर्चा हुई, जब नागरिकता संशोधन अधिनियम लाया गया, हर बार, हर मोर्चे पर, इन्होंने सिर्फ विरोध ही किया |
उन्होंने कहा कि महिलाओं के अधिकारों पर राजनीति करने वालों को देश की महिलाएं कभी माफ नहीं करेंगी। आज गांव की महिलाएं पंचायत चला रही हैं। शहरों की महिलाएं उद्योग चला रही हैं, देश की महिलाएं हर क्षेत्र में नेतृत्व कर रही हैं, तो फिर संसद में उनकी भागीदारी से विपक्ष क्यों डर रहा है? सच्चाई यह है कि विपक्ष को डर है कि महिलाओं के सशक्त होने से झूठ पर टिकी उनकी राजनीति की जमीन खिसक जाएगी। विपक्ष ने केवल एक विधेयक को नहीं गिराया है, बल्कि करोड़ों माताओं और बेटियों के सपनों को कुचलने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने नारी शक्ति वंदन बिल को रोककर लोकतंत्र की मर्यादा को तार-तार किया है। संसद में विपक्ष का व्यवहार लोकतंत्र के मंदिर में नारी शक्ति का चीरहरण है।
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में देश की महिलाएं अपने वोट की ताकत से महिला – विरोधी मानसिकता रखने वाले दलों को करारा जवाब देंगी। उन्होंने कहा कि सरकार महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और भविष्य में भी उनके अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे। इस अवसर पर अशोक तिगड़ी, भूपेंद्र तिगड़ी, अजीत तिगड़ी, धर्मेंद्र अरोड़ा, विजय अरोड़ा सहित अनेक भाजपा कार्यकर्ता उपस्थित थे
