राजेश बिष्ट नए भारत का उदय
नई दिल्ली। सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्रवार को देश भर के सभी उच्च न्यायालयों को न्यायिक प्रणाली में विलंब को कम करने और निर्णयों की त्वरित डिलीवरी सुनिश्चित करने के लिए सख्त निर्देश जारी किए। संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का प्रयोग करते हुए, भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि आरक्षित निर्णयों को 3 महीने के भीतर सुनाया जाना चाहिए।

कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अगर कोई फैसला रिजर्व करने के तीन महीने के अंदर सुनाया नहीं जाता, तो संबंधित हाईकोर्ट का रजिस्ट्रार जनरल उसे मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखेगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मुख्य न्यायाधीश अधिकतम दो सप्ताह का अतिरिक्त समय दे सकते हैं। यदि इसके बाद भी पालन नहीं होता, तो केस दूसरी बेंच को स्थानांतरित कर दिया जाएगा। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि बहस पूरी होने के बाद जजमेंट रिजर्व की तारीख हाईकोर्ट की वेबसाइट पर सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की जाए।
