राजेश बिष्ट नए भारत का उदय
भिवानी। मानव पोषण सलाहकार डॉक्टर पूजा ने बताया कि गर्मी के दिनों में शरीर के हाइड्रेट रखने के लिए पर्याप्त पानी की जरूरत तो है ही है साथ ही इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन भी आवश्यक है अन्यथा हाइपोनेट्रेमिया के रूप में एक बड़ी मुसीबत का सामना करना पड़ सकता है हाइपोथर्मिया क्या है इसका क्या समाधान है किन बातों का ध्यान रखें।गर्मी से बचाना है तो रोजाना 4 से 5 लीटर पानी पीना चाहिए यदिआप ऐसा सोच रहे हैं तो यह एक धारणा है नहीं दरअसल आपको पानी कितना लेना चाहिए या आपके शरीर की स्थिति और आपकी क्रियाशीलता पर निर्भर करता है शरीर में पानी को पूरा करने के लिए आमतौर पर सदा पानी की सबसे अच्छा विकल्प होता है

दफ्तर में एक पर बैठकर काम हल्की-फुल्की शहर या घरेलू काम खास करते हैं और संतुलित भोजन के साथलेते रहते हैं तो इससे आप गर्मी से आसानी से निकला मुकाबलाकर सकते हैं पर आप रोजाना कसरत या अधिक मेहनत वाला काम करते हैं बाहर धूप में अधिक समय बिताते हैं तो केवल पानी से हाइपोटेनिया का खतराखतरा रहता है। इससे बचाव के लिए आपको पानी के साथ-साथ इलेक्ट्रोलाइट की जरूरत पड़ती है ध्यान रहे इलेक्ट्रोलाइट को आप केवल पानी से रिप्लेस नहीं कर सकते बता दे कि हमारे सामान्य भोजन में भी इलेक्ट्रोलाइट मिल जाते हैं लेकिन अभी पसीना आने की स्थिति या अधिक समय तक धूप में रहने या किसी अन्य इंस्टिट्यूट में आने के बाद इलेक्ट्रोलाइट का संतुलन जरूरी हो जाता है अन्यथा रोहत को गंभीर नुकसान हो सकता है आप बेहोश बेहोश या कॉम की स्थिति में पहुंच सकते हैं।
हाइपोनेटेमिया एक ऐसी स्थिति है जो रक्त में सोडियम की कम मात्रा के कारण उत्पन्न होती है सोडियम शरीर की कोशिकाओं में और उसकी आसपास पाए जाने वाले पानी की मात्रा को नियंत्रित करने में भूमिका निभाता है। हाइपोनेटेगिया किसी अंतर ही स्वास्थ्य समस्या से लेकर अत्यधिक पानी पीने के कारण उत्पन्न होती है ऐसा होने पर शरीर में पानी की मात्रा बढ़ जाता है और कोशिकाएं फूलने लगती है यह सूजन कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है और अधिकतम रूप से आपातकालीन स्थिति उत्पन्न कर सकती है स्थिति गंभीर होने पर अस्पताल में भर्ती करने की नौबत आती है।
हाइपोनेट्रेमिया के क्या है लक्षण
मांसपेशियों में ऐंठन या कमजोरी महसूस होना, सुस्ती महसूस होना, जी मिचलाना या उल्टी होना, तेज सिर दर्द की समस्या होना, भरम या मानसिक अवस्था में अन्य बदलाव, बेहोश होना।
क्यों है हाइड्रेशन महत्वपूर्ण शरीर में पर्याप्त पानी होने से ऊर्जा एकाग्रता और संपूर्ण स्वास्थ्य की स्थिति बेहतर बनी रहती है काम करने चलने या छोटे-मोटे काम करने जैसे रोजमर्रा के कार्यों के दौरान अक्सर पानी पीना ही प्राप्त होता है। अलग से इलेक्ट्रोमैग्नेट की जरूरत नहीं होती है लेकिन अधिक शारीरिक श्रम करने के दौरान इसमें पसीना आए तो शरीर को पूरी तरह से हाइड्रेट रखने के लिए सिर्फ पानी से ज्यादा की जरूरत पड़ सकती है। यहीं पर इलेक्ट्रोलाइट ही भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। इलेक्ट्रोलाइट ऐसा खनिज है जो शरीर में तरल संतुलित मांसपेशियों के संकुचन और नियंत्रण क्रिया को नियंत्रित करने में मदद करते हैं इसमें सोडियम पोटेशियम कैल्शियम और मैग्नीशियम शामिल होते हैं यदि आप इनका सेवन करते रहे तो शरीर में पानी की कमी नहीं होती है और शारीरिक सक्रियता को बनाए रखने में उरो मदद मिलती है
कब इलेक्ट्रोलाइट नहीं लेना चाहिए
जब शरीर से तरल पदार्थ की हानि न्यूनता होती है यानी जब आप सोडियम या पोटेशियम की महत्वपूर्ण मंत्र नहीं हो रहे हैं इस तरह की स्थिति में आपके शरीर को सही ढंग से कार्य करने के लिए इलेक्ट्रोलाइट युक्त पर पदार्थ की अलग से आवश्यकता नहीं होती है।
कब इलेक्ट्रोलाइट लेना चाहिए
लंबे समय तक पसीना आने पर गाहे गर्मी व्यायाम या बीमारी के कारण हो शरीर से काफी मात्रा में इलेक्ट्रोलाइट्स निकल जाते हैं ऐसे में इलेक्ट्रोलाइट युक्त पर पदार्थ उपयोग साबित होते हैं गर्मी उमस भरे दिन जिसमें भारी गतिविधियां शामिल हो। एक घंटे से अधिक समय तक कसरत कर रहे होकोई भी ऐसी स्थिति जिसमें बहुत अधिक और बार-बार पसीना आता हो। बार-बार उल्टी या दस्त होने की स्थिति में इलेक्ट्रोलाइट पर पदार्थ में खुले खनिज लवण पदार्थ मुख्य रूप से सोडियम और पोटेशियम होते हैं। यह प्रभावी ढंग से तरल पदार्थ को अवशोषित करने में मदद करते हैं। आप तेजी से हाइड्रेट होते हैं और तनाव की स्थिति में भी लंबे समय तक पानी की कमी नहीं होती है।
इलेक्ट्रोलाइट युक्त कुछ आहार
केला, नारंगी, आलू, बुखारा, चेरी, तरबूज, स्ट्रॉबेरी, आम, एवोकाडो, अनानास, शकरकंद दही ले। फल में केला संतरा तरबूज और एवोकाडो पोटेशियम के बेहतरीन स्रोत है। हरी पत्तेदार सब्जियों मे पालक और केला जैसी हरी पत्तेदार सब्जियां और शकरकंद। पेय पदार्थ मे नारियल पानी नींबू पानी (हल्का सा नमक) और छाछ। डेरी उत्पादन मे दही और पनीर (कैल्शियम और सोडियम के लिए)। अन्य खाद्य पदार्थ में भी बी और (मैग्नीशियम के लिए) डालें।
