बिजेश जावला की माता शांति देवी की स्मृति में गौसेवा, गीता पाठ और पौधारोपण

राजेश बिष्ट नए भारत का उदय

भिवानी। नवदुर्गा सेवा सहयोग संस्था के पर्यावरण रक्षक योगाचार्य जेई बिजेश जावला ने अपनी माता स्व. शांति देवी की दसवीं पुण्यतिथि पर सेवा, संस्कार और आध्यात्मिकता से जुड़े कार्यक्रम आयोजित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर गौसेवा, गीता पाठ, सत्संग, पौधारोपण एवं प्रसाद वितरण के कार्यक्रम आयोजित किए गए।कार्यक्रम की शुरुआत संजय परमार की गौशाला में गोवंश के लिए निःशुल्क दवाइयां, गुड़ वं चारा देकर की गई।

इस दौरान योगाचार्य जेई बिजेश जावला ने कहा कि उनकी माता स्व. शांति देवी ने उन्हें बचपन से ही सेवा, परोपकार, धार्मिक आस्था और समाज के प्रति जिम्मेदारी के संस्कार दिए। उन्हीं की प्रेरणा से वे सामाजिक, धार्मिक एवं पर्यावरण संरक्षण के कार्यों में निरंतर सक्रिय हैं। उन्होंने कहा कि मां का कर्ज कोई भी संतान कभी नहीं उतार सकती, लेकिन उनके बताए मार्ग पर चलकर उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि अवश्य दी जा सकती है।

इसके उपरांत महम रोड स्थित जन स्वास्थ्य विभाग परिसर में उनके निवास स्थान पर श्री कृष्ण कृपा जिओ गीता परिवार द्वारा गीता पाठ, भजन-सत्संग एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। गीता के श्लोकों और भजनों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया तथा श्रद्धालुओं ने धर्म और मानव सेवा के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।कार्यक्रम के दौरान पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए परिसर में 10 पौधे लगाए गए। उपस्थित लोगों ने पौधों की देखभाल करने तथा अधिक से अधिक पौधारोपण करने का संकल्प लिया। योगाचार्य बिजेश जावला ने कहा कि वृक्ष मानव जीवन का आधार हैं और पर्यावरण संरक्षण वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि माता-पिता का स्थान जीवन में सर्वोच्च होता है। उनके द्वारा दिए गए संस्कार ही व्यक्ति को समाज में एक नई पहचान दिलाते हैं। स्व. शांति देवी धार्मिक विचारों वाली, सरल स्वभाव की एवं सेवा भावना से ओतप्रोत महिला थीं। उनके संस्कारों का ही परिणाम है कि योगाचार्य जेई बिजेश जावला आज समाज सेवा, गौसेवा और पर्यावरण संरक्षण के कार्यों में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं।श्री कृष्ण कृपा जिओ गीता परिवार के पदाधिकारियों ने कहा कि माता-पिता की स्मृति में समाजहित के कार्य करना सबसे बड़ी श्रद्धांजलि है।

गीता का ज्ञान व्यक्ति को जीवन में सही दिशा देता है, वहीं गौसेवा और पौधारोपण मानवता एवं प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारी का प्रतीक हैं। उन्होंने सभी से अपने माता-पिता के आदर्शों को जीवन में अपनाने तथा सेवा कार्यों में बढ़-चढ़कर भाग लेने का आह्वान किया।कार्यक्रम के समापन पर श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। इस अवसर पर श्री कृष्ण कृपा जिओ गीता परिवार के सभी पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे।

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