राजेश बिष्ट नए भारत का उदय
भिवानी। स्वतंत्रता सेनानी एवं हरियाणा केसरी पंडित नेकीराम शर्मा ने जीवन भर अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष किया। उन्होंने अंग्रेज डीसी के 25 मुरब्बे जमीन देने के प्रलोभन को न केवल ठुकरा दिया, बल्कि यह भी कहा कि ये पूरा देश ही मेरा है, अंग्रेजों तुम मुझे क्या जमीन दोगे। आज पूरा देश इनको भावभीनी श्रद्धांजलि दे रहा है। पंडित नेकीराम शर्मा की पुण्यतिथि पर उन्हें याद करते हुए भारतीय जनता पार्टी कार्यकर्ताओं ने पंडित नेकीराम शर्मा के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हे श्रद्धांजलि अर्पित की है।
श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए भाजपा के पूर्व प्रदेश सह मीडिया प्रमुख रीतिक वधवा ने कहा की पंडित नेकीराम शर्मा को देश के श्रेष्ठ नेताओं गोपाल कृष्ण गोखले, लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक, पंजाब केसरी लाला लाजपतराय, बाबू सुरेंद्र नाथ बैनर्जी व महामना पंडित मदन मोहन मालवीय से मिलने का मौका मिला तथा उनके भाषणों से प्रेरणा मिली। अंग्रेज सरकार द्वारा 1907 में भगत सिंह, सरदार अजीत सिंह, लाला लाजपतराय को मांडले जेल भेजना तथा 1908 में लोकमान्य तिलक पर अभियोग चलाना नेकीराम को सहन नहीं हुआ और वे अंग्रेजी सरकार के घोर विरोधी बन गए।
जब लोकमान्य तिलक को 6 वर्ष कठोर कारावास की सजा सुनाई तो नेकीराम ने एक दिन का उपवास रखा तथा यह प्रतिज्ञा की कि जब तक अंग्रेजी राज समाप्त नहीं हो जाता, तब तक चैन से नहीं बैठेंगे। उन्होंने कहा कि पंडित नेकीराम शर्मा रौलेट एक्ट विरोधी आंदोलन 1919, असहयोग आंदोलन 1920-22, नमक सत्याग्रह 1930-34, व्यक्तिगत सत्याग्रह 1940-41 एवं भारत छोड़ा आंदोलन 1942-44 में अग्रणी भूमिका में रहे। इस अवसर पर किसान मोर्चा पूर्व जिला अध्यक्ष तिगड़ी भूपेंद्र तिगड़ी, अजीत तिगड़ी, धर्मेंद्र अरोड़ा, विजय अरोड़ा, पंकज शर्मा, मुकेश कुमार ने भी स्वतंत्रता सेनानी एवं हरियाणा केसरी पंडित नेकीराम शर्मा की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित की है।
