डॉ.मुखर्जी का मानना था कि सत्ता का मूल उद्देश्य राज करना नहीं बल्कि राष्ट्र-निर्माण के लिए समर्पित भाव से कार्य करना है : रीतिक वधवा

राजेश बिष्ट नए भारत का उदय

भिवानी। भारतीय जनसंघ के संस्थापक, महान शिक्षाविद्, प्रखर राष्ट्रवादी विचारक एवं राष्ट्रीय एकता और अखंडता के प्रतीक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर उनके राष्ट्र निर्माण में दिए गए योगदान को याद करते हुए उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प भी लिया गया।

भाजपा के पूर्व प्रदेश सह मीडिया प्रमुख रीतिक वधवा ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने राष्ट्र की एकता और अखंडता के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया। उन्होंने कहा कि एक समय जम्मू-कश्मीर में प्रवेश के लिए परमिट लेना पड़ता था, लेकिन डॉ. मुखर्जी ने “एक विधान, एक प्रधान और एक निशान” के संकल्प को लेकर संघर्ष किया और इसी उद्देश्य के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। उनके संघर्ष और त्याग के कारण ही कश्मीर भारत का अभिन्न अंग बना और परमिट व्यवस्था समाप्त हुई।

उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी का मानना था कि सत्ता का मूल उद्देश्य शासन करना नहीं, बल्कि राष्ट्र-निर्माण के लिए समर्पित भाव से कार्य करना है। उनका सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का दर्शन तथा भारत की मूल संस्कृति के अनुरूप नीतियों को अपनाने का विचार आज भी देशवासियों के लिए प्रेरणास्रोत है। इस अवसर पर किसान मोर्चा के पूर्व जिला अध्यक्ष अशोक तिगड़ी, भूपेंद्र तिगड़ी तथा अजीत तिगड़ी सहित अन्य भाजपा कार्यकर्ताओं ने भी डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए।

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