राजेश बिष्ट नए भारत का उदय
चंडीगढ़। पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च चंडीगढ़ ने चिकित्सा तकनीक के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। संस्थान के गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग ने ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के तहत एक स्वदेशी कैथेटर तैयार किया है, जो डिजिटल मीटर की मदद से यह सटीक रूप से बता सकेगा कि मरीज की आंतें कितनी गंभीर रूप से बीमार या क्षतिग्रस्त हैं। इस तकनीक से पेट और आंत की गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए बेहतर इलाज की उम्मीद बढ़ी है।
अब तक की चुनौती
पीजीआई के विशेषज्ञों के मुताबिक, अब तक आंतों की गतिशीलता और सूजन या बीमारी की गंभीरता जांचने के लिए महंगी विदेशी मशीनों और जटिल प्रक्रियाओं पर निर्भर रहना पड़ता था। रिपोर्ट आने में देरी के चलते कई बार गंभीर मरीजों का इलाज समय पर शुरू नहीं हो पाता था।कैसे करेगा कामनए कैथेटर में लगे सेंसर सीधे आंतों की दीवारों के संपर्क में आकर डिजिटल मीटर पर रीडिंग दिखाएंगे। इससे डॉक्टर तुरंत यह जान सकेंगे कि आंत का कौन-सा हिस्सा प्रभावित है और बीमारी किस स्टेज पर है।
मरीजों को होगा सीधा फायदाइस डिवाइस का सबसे बड़ा लाभ आर्थिक रूप से कमज़ोर मरीजों को मिलेगा। पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से बना यह कैथेटर विदेशी उपकरणों की तुलना में करीब एक-चौथाई लागत में उपलब्ध होगा। पीजीआई प्रशासन के अनुसार, डिवाइस के क्लीनिकल ट्रायल सफलतापूर्वक पूरे हो चुके हैं और जल्द ही इसे व्यापक स्तर पर मरीजों की जांच के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। इस तकनीक से जांच का खर्च घटेगा और आंतों के अल्सर, कोलाइटिस तथा शुरुआती कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों को समय रहते पहचानने में डॉक्टरों को बड़ी मदद मिलेगी।
