गीता के रहस्य को समझने वाला ही उसके मर्म तक पहुंचता है : गीता मनीषी ज्ञानानंद महाराज

राजेश बिष्ट नए भारत का उदय

भिवानी। स्थानीय दिनोद गेट स्थित अंचल अस्पताल में तीन दिवसीय दिव्य गीता संदेश व प्रवास पर पहुंचे स्वामी ज्ञानानंद महाराज का भव्य शंख ध्वनि, पंडित व विद्वानों और विवेकानंद हाई स्कूल के अष्टादश गीता श्लोकी विद्यार्थियों ने गीता के 18 श्लोको का उच्चारण कर गीता मनीषी ज्ञानानंद महाराज का सम्मान व स्वागत किया। यही इस अवसर पर अस्पताल में आयोजित कार्यक्रम के संयोजक डॉ विनोद अंचल व डॉ अनीता अंचल ने पुष्प माला व गीता की पुस्तक भेंट कर गीता मनीषी ज्ञानानंद महाराज का सम्मान किया।

इस दौरान गीता मनीषी ज्ञानानंद महाराज ने उपस्थित चिकित्सकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा गीता प्रेमियों को श्रीमद्भगवद्गीता के गूढ़ रहस्यों से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति गीता के रहस्य को समझ लेता है, वह उसके वास्तविक मर्म तक पहुंच जाता है और उसका जीवन सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ने लगता है।

ज्ञानानंद महाराज ने गीता के द्वितीय अध्याय के श्लोक 42 से 46 का सरल भावार्थ समझाते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को कर्म, ज्ञान और वैराग्य का अद्भुत संदेश दिया है। उन्होंने बताया कि केवल सकाम कर्मों और भौतिक सुखों की कामना करने वाला व्यक्ति जीवन के वास्तविक उद्देश्य से भटक जाता है। ऐसे लोगों का मन भोग और ऐश्वर्य में उलझा रहता है, जिससे उनकी बुद्धि कभी भी परमात्मा में स्थिर नहीं हो पाती।

उन्होंने कहा कि गीता मनुष्य को निष्काम कर्म का मार्ग अपनाने की प्रेरणा देती है। जो व्यक्ति बिना किसी स्वार्थ और फल की इच्छा के अपने कर्तव्य का पालन करता है, वही सच्चे अर्थों में योगी कहलाता है। उन्होंने कहा कि तीनों गुणों से ऊपर उठकर आत्मा में स्थित रहने वाला व्यक्ति ही वास्तविक शांति और आनंद का अनुभव करता है।

गीता मनीषी ने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार चारों ओर पानी से भरे विशाल जलाशय के सामने छोटे तालाबों का कोई विशेष महत्व नहीं रह जाता, उसी प्रकार जो व्यक्ति ब्रह्मज्ञान प्राप्त कर लेता है, उसके लिए वेदों का सार स्पष्ट हो जाता है। इसलिए मनुष्य को बाहरी दिखावे और भौतिक आकर्षण से ऊपर उठकर आत्मज्ञान की ओर अग्रसर होना चाहिए।

उन्होंने उपस्थित चिकित्सकों से आह्वान किया कि वे रोगियों का उपचार केवल सेवा भाव से करें, क्योंकि निस्वार्थ सेवा भी ईश्वर की आराधना का श्रेष्ठ माध्यम है। वहीं सामाजिक कार्यकर्ताओं से समाज में नैतिकता, सद्भाव और आध्यात्मिक मूल्यों के प्रचार-प्रसार का आग्रह किया। इस अवसर पर 11 पंडितों एवं विवेकानंद हाई स्कूल के अष्टादश विद्यार्थियों ने गीता के 18 श्लोको का उच्चारण कर गीता मनीषी ज्ञानानंद महाराज का सम्मान व स्वागत किया।

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