
उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए सीमा शुल्क के स्लैब में कटौती मेक इन इंडिया को देगी गति : विनोद बापना
राजेश बिष्ट
गुरूग्राम : केंद्रीय वित्त मंत्री द्वारा रविवार को पेश किए गए केंद्रीय बजट पर उद्योग जगत की मिली-जुली प्रतिक्रिया सामने आई है। जहां एक ओर एमएसएमई, टेक्सटाइल और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए बड़े प्रावधानों की सराहना की गई है, वहीं दूसरी ओर कर प्रणाली में वेतनभोगी वर्ग को खास राहत न मिलने पर निराशा भी जताई गई है। बजट के प्रमुख फैसलों को लेकर सीआईआई गुरुग्राम जोन के चेयरमैन विनोद बापना और मुंजाल शोवा के चेयरमैन व मैनेजिंग डायरेक्टर योगेश मुंजाल ने अपनी विस्तृत प्रतिक्रिया दी है। कुल मिलाकर, उद्योगपतियों का मानना है कि यह बजट औद्योगिक बुनियादी ढांचे को मजबूत करने वाला है।
सुप्रसिद्ध उद्योगपति मुंजाल शोवा के चेयरमैन व मैनेजिंग डायरेक्टर योगेश मुंजाल ने बजट को भविष्योन्मुखी करार दिया। उन्होंने स्वास्थ्य, रेलवे और कपड़ा उद्योग के लिए किए गए आवंटन को देश की अर्थव्यवस्था के लिए गेम चेंजर बताया। योगेश मुंजाल ने 36 जीवन रक्षक दवाओं पर सीमा शुल्क हटाने के फैसले को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि इससे आम आदमी के लिए इलाज सस्ता होगा। साथ ही 5 क्षेत्रीय चिकित्सा हब की स्थापना से टियर-2 और टियर-3 शहरों में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार होगा। उन्होंने ट्रेनों और उच्च गति वाले रेल गलियारों के लिए 1.5 लाख करोड़ का प्रावधान लॉजिस्टिक्स लागत को कम करेगा।
उन्होंने नेशनल फाइबर स्कीम और समर्थ 2.0 की सराहना की, जिससे कपड़ा उद्योग में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। मुंजाल ने कहा कि 10 हजार करोड़ के एमएसएमई ग्रोथ फंड और सेल्फ रिलायंट इंडिया फंड’ में अतिरिक्त निवेश से छोटे उद्योगों को नकदी के संकट से मुक्ति मिलेगी।साथ ही उन्होंने एमएसएमई, टेक्सटाइल और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए बड़े प्रावधानों की सराहना की।

सीआईआई गुरुग्राम जोन के चेयरमैन विनोद बापना ने बजट के औद्योगिक प्रावधानों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए सीमा शुल्क के स्लैब में जो कटौती की है, उससे मेक इन इंडिया को नई गति मिलेगी। हालांकि उन्होंने कर प्रावधानों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वेतनभोगी और मध्यम वर्ग के लोगों को इस बजट से काफी उम्मीदें थीं, लेकिन आयकर स्लैब में कोई बड़ा बदलाव न होने से उनके हाथ निराशा ही लगी है।
बापना ने कहा कि केंद्रीय बजट 2026-27 को एक सुधार-उन्मुख और स्थिरता-आधारित बजट के रूप में देखा जा सकता हे जो तात्कालिक लोकलुभावन फैसलों से आगे बढक़र भारत की दीर्घकालिक आर्थिक क्षमता को मजबूत करने पर केंद्रित है। उन्होंने कहा कि 40 हजार करोड़ के सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 और 12.2 लाख करोड़ के कैपेक्स लक्ष्य के साथ सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि भविष्य की अर्थव्यवस्था तकनीक और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर पर आधारित होगी जो विकसित भारत 2047 की दिशा मे एक बढ़ता कदम है।
