सांग समाज को जगाने व जोडऩे का काम करता है : हनुमान कौशिक


राजेश बिष्ट

बौंद कलां में बाबा चंद्र दास धाम मेले में सांग कलाकारों का सम्मान, हरियाणवी संस्कृति संरक्षण का दिया संदेश

भिवानी। गांव बौंद कलां स्थित बाबा चंद्र दास धाम में आयोजित पारंपरिक मेले में हरियाणवी लोक संस्कृति, सांग विधा और सांस्कृतिक मूल्यों को समर्पित भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर सांग कला के प्रसिद्ध कलाकार दान सिंह सांगी को 32 पंवार खाप की ओर से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में क्षेत्रभर से आए कलाकारों, गणमान्य व्यक्तियों एवं ग्रामीणों की उपस्थिति ने आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया।

कार्यक्रम के दौरान गांव की ओर से धर्मबीर सिंह नागर ने उपस्थित सभी कलाकारों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया और उनके योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि सांग जैसी लोक विधाएं हरियाणा की पहचान हैं, जिन्हें सहेजना और आने वाली पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी का दायित्व है। कार्यक्रम में विशेष रूप से उपस्थित रहे। 

म्हारी संस्कृति म्हारा स्वाभिमान संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष हनुमान कौशिक ने सांग विधा की महत्ता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्राचीन सभ्यता, संस्कृति, संगीत और संस्कारों की सशक्त पहचान सांग है। सांग केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि समाज को जगाने, जोड़ने और दिशा देने वाली लोक विधा है। उन्होंने बताया कि चिरकाल से सांग के माध्यम से समाज को ऐतिहासिक कथाओं, राजाओं-महाराजाओं के किस्सों, वीरों की गाथाओं और नैतिक मूल्यों से परिचित कराया जाता रहा है। यही कारण है कि सांग हरियाणवी लोक जीवन का अभिन्न हिस्सा रहा है।

हनुमान कौशिक ने कहा कि हरियाणवी गायन शैली में लगभग 40 से अधिक लोक विधाएं हैं, जिनके माध्यम से समाज में प्रेम, भाईचारा, देशभक्ति और मर्यादा का संदेश दिया जाता है। कुछ सांग प्रेम और मोहब्बत की भावना को मजबूत करते हैं, तो कुछ देशभक्ति, त्याग और अनुशासन का पाठ पढ़ाते हैं। इन लोक विधाओं का प्रभाव आज भी हमारी सामाजिक संरचना और संस्कारों में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि देश की आजादी के समय लोक गीतकारों और संगीतकारों ने अपनी लेखनी और सुरों से ऐसा देशभक्ति का वातावरण बनाया, जिसने वीरों और वीरांगनाओं में बलिदान की भावना को और प्रबल किया। लोक गीतों ने आम जनमानस को भी स्वतंत्रता संग्राम से जोड़े रखा और राष्ट्र के प्रति समर्पण का भाव पैदा किया।

उन्होंने ने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि आज का युवा अपनी जड़ों और संस्कृति को भूलकर पाश्चात्य संस्कृति और नशे की ओर अग्रसर होता जा रहा है, जो समाज के लिए चिंताजनक है। यदि समय रहते युवाओं को अपनी संस्कृति से नहीं जोड़ा गया तो इसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं के जीवन को सही दिशा देने के लिए सांग जैसी लोक विधाओं को अपनाना और प्रोत्साहित करना बेहद जरूरी है।

कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों, कलाकारों और ग्रामीणों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर गांव के बुजुर्गों, युवाओं, महिलाओं सहित समस्त ग्रामीणों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। मेले का माहौल पूरे दिन लोक संगीत, सांग और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से सराबोर रहा। कार्यक्रम मे यह संदेश दिया कि यदि समाज अपनी लोक संस्कृति, सांग और परंपराओं से जुड़ा रहेगा, तो आने वाली पीढ़ी को संस्कार, स्वाभिमान और सांस्कृतिक पहचान स्वतः प्राप्त होती रहेगी।

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