राजेश बिष्ट

महाशिवरात्रि पर सिद्धि धाम में हुआ आध्यात्मिक संगोष्ठी का आयोजन
भिवानी। परमात्मा शिव साकार रूप में नहीं, बल्कि एक ज्योतिर बिंदु स्वरूप है। उसकी वास्तविक अनुभूति केवल आध्यात्म और राजयोग साधना के माध्यम से ही संभव है। यह उद्गार चित्रकूट, सतना से पधारे प्रसिद्ध आध्यात्मिक संत एवं प्रवचनकर्ता आचार्य स्वामी परमानंद ने प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की शाखा सिद्धि धाम, भिवानी में महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर व्यक्त किए।कार्यक्रम का आयोजन शाखा प्रमुख राजयोगिनी बीके सुमित्रा एवं राजयोगिनी बीके कीर्ति बहन के सानिध्य में किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में समाजसेवी, संत, बुद्धिजीवी वर्ग तथा ब्रह्माकुमारी संस्थान से जुड़े ब्रह्मावत्स उपस्थित रहे।

आचार्य स्वामी परमानंद ने अपने प्रवचन में कहा कि आज का मानव बाहरी दिखावे और भौतिक सुखों की ओर अधिक आकर्षित हो गया है, जबकि वास्तविक शांति और आनंद आत्मा की पहचान और परमात्मा से जुड़ने में निहित है। उन्होंने कहा कि परमात्मा शिव निराकार हैं और उन्हें किसी मूर्ति या देह से जोड़कर देखना सीमित दृष्टि है। ज्योतिर बिंदु स्वरूप परमात्मा से आत्मिक संबंध स्थापित कर ही मानव जीवन को सार्थक बनाया जा सकता है।उन्होंने योग क्रिया, योग की परिभाषा तथा योगी व्यक्ति की पहचान पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि आत्मा और परमात्मा के बीच चेतन संबंध स्थापित करने की प्रक्रिया है। योगी वही है, जो अपने विचारों, कर्मों और संस्कारों में पवित्रता, शांति और सकारात्मकता को धारण करे।

आचार्य स्वामी परमानंद ने कहा कि महाशिवरात्रि केवल एक पर्व नहीं, बल्कि आत्म जागृति का संदेश देने वाला महापर्व है। यह पर्व हमें याद दिलाता है कि हमें अज्ञान के अंधकार से निकलकर ज्ञान के प्रकाश की ओर बढ़ना चाहिए। राजयोग के अभ्यास से आत्मा शुद्ध होती है और जीवन में संतुलन आता है।इस अवसर पर शाखा प्रमुख राजयोगिनी बीके सुमित्रा ने कहा कि प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय द्वारा निरंतर समाज में आध्यात्मिक जागरूकता फैलाने का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आज के तनावपूर्ण जीवन में राजयोग ही वह माध्यम है, जो मानव को मानसिक शांति और आत्मिक बल प्रदान करता है।

राजयोगिनी बीके कीर्ति बहन ने कहा कि शिवरात्रि का पर्व आत्मा के परमात्मा से मिलन का प्रतीक है। जब आत्मा अपने वास्तविक स्वरूप को पहचानती है, तभी जीवन में सच्चा परिवर्तन संभव होता है।कार्यक्रम के दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं ने ध्यान व योग सत्र में भाग लिया और आध्यात्मिक अनुभव साझा किए। वातावरण पूरी तरह शांत, पवित्र और सकारात्मक ऊर्जा से ओतप्रोत नजर आया।इस मौके पर बीके आरती, बीके श्वेता, बीके शारदा, बीके संतोष, बीके माया, बीके भीम सिंह चौहान, मीडिया कोऑर्डिनेटर बीके धर्मवीर सहित अनेक ब्रह्मावत्स उपस्थित रहे। सभी ने कार्यक्रम को प्रेरणादायक बताते हुए इस तरह के आयोजनों को समाज के लिए आवश्यक बताया।कार्यक्रम के अंत में विश्व शांति और मानव कल्याण की कामना के साथ विशेष राजयोग ध्यान कराया गया तथा सभी आगंतुकों का आभार व्यक्त किया गया।
