राजेश बिष्ट
फर्जी मूल्यांकन रिपोर्ट के आधार पर करवाया गया था लोन, अन्य आरोपियों की तलाश जारी
भिवानी। जिला पुलिस भिवानी ने चोलामंडलम इन्वेस्टमेंट एंड फाइनेंस कंपनी से 1 करोड़ 58 लाख 60 हजार रुपये का फर्जी तरीके से लोन करवाने के मामले में बड़ी सफलता हासिल करते हुए मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस अधीक्षक भिवानी सुमित कुमार के निर्देशानुसार धोखाधड़ी के मामलों में संलिप्त आरोपियों के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत यह कार्रवाई की गई। इस संबंध में चोलामंडलम इन्वेस्टमेंट एंड फाइनेंस कंपनी की शाखा भिवानी के लीगल मैनेजर वीरेंद्र सिंह द्वारा थाना शहर भिवानी में शिकायत दर्ज करवाई गई थी।

शिकायत में आरोप लगाया गया कि मनोज व संदीप निवासी गांव जड़वा, तहसील सतनाली जिला महेंद्रगढ़ ने कंपनी से धोखाधड़ी पूर्वक 1 करोड़ 58 लाख 60 हजार रुपये का लोन प्राप्त किया। शिकायत के अनुसार आरोपियों ने अपनी कृषि भूमि को व्यावसायिक भूमि दर्शाया तथा सतनाली क्षेत्र की दुकानों की फर्जी फोटो एवं जाली मूल्यांकन रिपोर्ट तैयार करवाई। इस फर्जी दस्तावेजीकरण के आधार पर भूमि की वास्तविक कीमत से कहीं अधिक मूल्य दर्शाकर लोन स्वीकृत कराया गया। शिकायत प्राप्त होने पर थाना शहर भिवानी में संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई। पुलिस अधीक्षक सुमित कुमार के दिशा-निर्देशों पर इन्वेस्टिगेशन विंग-4 की टीम को मामले की गहन जांच का जिम्मा सौंपा गया। जांच के दौरान दस्तावेजों की पड़ताल, मूल्यांकन रिपोर्ट की सत्यता और भूमि के वास्तविक स्वरूप की पुष्टि की गई।

10 फरवरी 2026 को एएसआई सुरेंद्र सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी को नारनौल क्षेत्र से गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपी की पहचान बलजीत पुत्र शेर सिंह निवासी शेखपुरा जिला नारनौल के रूप में हुई है। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी बलजीत वेंडर का कार्य करता है और उसने सह-आरोपियों के साथ मिलकर पूरी साजिश रची। आरोपी ने कृषि भूमि की जगह व्यावसायिक दुकानों की फर्जी फोटो संलग्न कर जाली मूल्यांकन रिपोर्ट तैयार की। इसी रिपोर्ट के आधार पर कंपनी को गुमराह करते हुए करोड़ों रुपये का लोन स्वीकृत करवाया गया।

गिरफ्तार आरोपी को 11 फरवरी को माननीय न्यायालय में पेश किया गया, जहां से पुलिस ने एक दिन का रिमांड हासिल किया। रिमांड अवधि के दौरान आरोपी से गहन पूछताछ की गई और धोखाधड़ी में शामिल अन्य व्यक्तियों के संबंध में जानकारी जुटाई गई।रिमांड पूर्ण होने के बाद आरोपी को पुनः न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जिला कारागार भेजने के आदेश जारी किए गए। पुलिस अधिकारियों के अनुसार मामले का अनुसंधान अभी जारी है। इस धोखाधड़ी में शामिल अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। पुलिस का कहना है कि पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि फर्जी दस्तावेज तैयार करने और लोन स्वीकृत करवाने में किन-किन लोगों की भूमिका रही।

पुलिस अधीक्षक सुमित कुमार ने कहा कि जिले में आर्थिक अपराधों को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वित्तीय संस्थानों को धोखा देने वालों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने आमजन से भी अपील की कि यदि किसी प्रकार की वित्तीय धोखाधड़ी की जानकारी हो तो तुरंत पुलिस को सूचित करें।जिला पुलिस की इस कार्रवाई को आर्थिक अपराधों के विरुद्ध बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। मामले में आगे की जांच जारी है और पुलिस जल्द ही अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर पूरे प्रकरण का खुलासा करने की तैयारी में है।
