सडक़ों की बदहाली पर पूर्व पार्षद ईश्वर मान का हल्ला बोल : समाधान शिविर में उपायुक्त को सौंपे दो मांग पत्र


भिवानी। भिवानी जिले के गांवों को जोडऩे वाली संपर्क सडक़ों की खस्ताहाल स्थिति और प्रशासनिक ढुलमुल रवैये के खिलाफ पूर्व जिला पार्षद ईश्वर सिंह मान ने मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को भिवानी में आयोजित समाधान शिविर के दौरान उन्होंने उपायुक्त को दो अलग-अलग मांग पत्र सौंपे, जिसमें पीडब्ल्यूडी और जिला परिषद के अधीन आने वाली सडक़ों की तत्काल मरम्मत और सफाई की मांग की गई है।
ईश्वर मान ने अपने पहले मांग पत्र में कुंगड़ से मुंढाल कलां लिंक रोड का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने बताया कि इस सडक़ की मरम्मत का कार्य पिछले चार महीनों से अधर में लटका हुआ है। विभाग ने रोड पर मोटा रोड़ा तो बिछा दिया है, लेकिन तालु और कुंगड़ के बीच करीब 5-7 एकड़ जमीन की पैमाइश (नाप-जोख) न होने के कारण काम ठप्प पड़ा है। सडक़ पर मिट्टी न डलने के कारण राहगीरों का पैदल या वाहन से निकलना दूभर हो गया है। मान ने मांग की कि  दोनों गांवों के पटवारियों को बुलाकर तुरंत पैमाइश कराई जाए ताकि कुंगड़, तालु, भैणी और मुंढाल कलां के ग्रामीणों को राहत मिल सके। साथ ही तालु से गुड़ानी मंदिर तक के रास्ते की जेसीबी से सफाई और जटाई से मुंढाल कलां रोड की मरम्मत की मांग भी की गई है।


       दूसरे पत्र में मान ने तालु से मुंढाल खुर्द लिंक रोड की दयनीय स्थिति पर चिंता जताई। यह मार्ग दिल्ली-रोहतक-हिसार को राजस्थान के राजगढ़, चूरू और सरदारशहर जैसे शहरों से जोडऩे वाला एक महत्वपूर्ण शॉर्टकट है। सडक़ के दोनों ओर 5-5 फुट की बर्म पर जंगली कीकर और झाड़-बोझड़ों ने कब्जा कर लिया है, जिससे सडक़ की चौड़ाई बेहद कम हो गई है। इस रास्ते से रोजाना हजारों ट्रैक्टर-ट्रॉली और पिकअप गाडिय़ां पशु चारा (तूड़ी-पराली) लेकर राजस्थान जाती हैं। झाडिय़ों की वजह से सामने से आने वाले वाहन दिखाई नहीं देते, जिससे आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। ईश्वर मान ने पीडब्ल्यूडी विभाग से मांग की है कि सडक़ के गड्ढे भरे जाएं और किनारों से झाडिय़ों की कटाई कराई जाए ताकि दोपहिया और अन्य वाहन चालक सुरक्षित सफर कर सकें।


     पत्रकारों से ईश्वर सिंह मान ने कहा कि ये सडक़ें इलाके की लाइफलाइन हैं। प्रशासन की लापरवाही के कारण आम जनता और किसान परेशान हैं। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि जल्द ही इन सडक़ों पर काम शुरू नहीं हुआ और झाडिय़ों की सफाई नहीं की गई, तो वे ग्रामीणों के साथ मिलकर बड़ा कदम उठाने को मजबूर होंगे।

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