बैंक शाखा बंद होने से सैकड़ों बुजुर्गों की पेंशन पर लगा ब्रेक, पार्षद अंकुर कौशिक ने लगाई गुहार

राजेश बिष्ट नए भारत का उदय


बैंक की गलती की सजा भुगत रहे है नागरिक : पार्षद अंकुर कौशिक
भिवानी। भिवानी नगर परिषद के वार्ड संख्या 5 से पार्षद अंकुर कौशिक ने शहर के सैकड़ों बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगों की रुकी हुई पेंशन का मुद्दा उठाते हुए समाधान शिविर में शिकायत दी है। बैंक की एक शाखा के बंद होने और उसके दूसरी शाखा में विलय के कारण तकनीकी खामियों की वजह से पिछले 2-3 महीनों से लाभार्थियों को पेंशन नहीं मिल पा रही है, जिससे उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। पार्षद अंकुर कौशिक ने कहा कि सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की एक शाखा जो पिछले 40-45 वर्षों से जालान अस्पताल में संचालित थी, उसे हाल ही में बंद कर घंटा घर शाखा में विलय कर दिया गया है। इस विलय के कारण बैंक का आईएफएससी कोड बदल गया। चूंकि वार्ड नंबर 4, 5, 6 और 7 के अधिकांश पेंशनभोगियों के खाते इसी शाखा में थे, इसलिए फैमिली आईडी में पुराने बैंक विवरण होने की वजह से अधिकत्तर बुढ़ापा, विधवा और दिव्यांग पेंशन रुक गई है तथा जिन बुजुर्गो की पेंशन आई है, वो भी एक माह की ही आई है।

पार्षद अंकुर कौशिक ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि बैंक शाखा का बंद होना और आईएफएससी कोड बदलना एक तकनीकी प्रक्रिया है, जिसमें गरीब और बुजुर्ग लाभार्थियों की कोई गलती नहीं है। पिछले 3 महीनों से इन बुजुर्गों को पेंशन नहीं मिली है, जो उनके जीवन निर्वाह का एकमात्र सहारा है। प्रक्रिया इतनी जटिल है कि पहले फैमिली आईडी में अपडेट की रिक्वेस्ट लगानी पड़ती है, फिर समाज कल्याण विभाग में फॉर्म जमा करना पड़ता है। सरकार को चाहिए कि इस तकनीकी समस्या का समाधान अपने स्तर पर तुरंत करे ताकि बुजुर्गों को दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें। उन्होंने कहा कि इस समस्या को समाधान शिविर में उठाए जाने के बावजूद भी समाधान नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि पेंशन न आने के कारण उन्हें दवाइयों और दैनिक खर्चों के लिए दूसरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। बैंक की गलती की सजा आम जनता को भुगतनी पड़ रही है। उन्होंने मांग की कि लाभार्थियों की पिछले 2-3 महीनों की रुकी हुई बकाया पेंशन तुरंत जारी की जाए और बैंक डेटा को सरकारी पोर्टल पर ऑटो-अपडेट करने की व्यवस्था की जाए ताकि भविष्य में ऐसी समस्या न आए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!