मन सतरंगी सावन हो जाए

मन सतरंगी सावन हो जाए

रंगों की बहार आए,
खुशियों की फुहारें लाए,
सतरंगी इंद्रधनुषी रंग आपके
जीवन को हरा-भरा कर जाए।

पुष्पों की बगिया खिल जाए,
शिरीष-पुष्प-सी आभा पाए,
पल-पल हो रंगोली-सा सुंदर,
हर शब्द मधुर कविता बन जाए।

करो कल्पना, सजे अल्पना,
हर द्वार सजे सतरंगी सावन,
पुलकित मन औ’ हर्षित तन हो,
प्रेम-भाव तर्पण बन जाए।

महके आँगन, चहके गलियाँ,
रंगों में मधुर स्पंदन घुल जाए,
मन की वीणा छेड़े सरगम,
हर क्षण अभिनंदन बन जाए।

सूनी राहें भी मुस्काएँ,
स्नेह-स्पर्श जो मिल जाए,
रूठे मन के कोने-कोने में
आशा का दीपक जल जाए।

ना रहे किसी मन में दूरी,
ना शिकवा, ना कोई मजबूरी,
हर रंग से बढ़कर हो रंग प्रीत का,
अपनेपन में सब जग घुल जाए।

हँसी की गूँजे हर क्यारी,
विश्वासों का हो अभिनव क्षण,
ऐसा हो यह रंगों का पर्व
जीवन मधुमय सावन बन जाए।

आपको, परिवार को, परिवेश को रंगोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं 

अभिषेक शर्मा ‘अभि’ 

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