राजेश बिष्ट नए भारत का उदय

मेडिकल कॉलेज में ईसीजी केंद्र पर कर्मचारियों पर अभद्र भाषा व मारपीट के लिए उतारू होने का आरोप
भिवानी। महान स्वतंत्रता सेनानी पंडित नेकीराम शर्मा के नाम से बने मेडिकल कॉलेज में अव्यवस्थाओं को लेकर मरीजों और उनके परिजनों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि अस्पताल में स्टाफ की कमी, दवाओं की अनुपलब्धता और जांच प्रक्रियाओं में देरी के कारण मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।मरीजों के परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में कई कर्मचारी अपने मोबाइल फोन में व्यस्त रहते हैं और मरीजों की समस्याओं पर समय पर ध्यान नहीं दिया जाता। कई मरीजों को ईसीजी जैसी जरूरी जांच करवाने के लिए तीन से चार दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है।

इस दौरान मरीजों और उनके परिजनों को अस्पताल के विभिन्न विभागों के चक्कर काटने पड़ते हैं।परिजनों का कहना है कि डॉक्टरों द्वारा लिखी गई दवाएं भी कई बार अस्पताल में पूरी तरह उपलब्ध नहीं होतीं, जिससे मरीजों को मजबूरन बाहर से दवाएं खरीदनी पड़ती हैं। वहीं जब मरीज या उनके परिजन जांच या दवाओं के बारे में जानकारी लेने जाते हैं तो कुछ कर्मचारियों का व्यवहार ठीक नहीं होता और कई बार अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने के आरोप भी लगाए गए हैं।
मरीजों ने बताया कि अस्पताल में नई और पुरानी बिल्डिंग के बीच स्पष्ट व्यवस्था न होने के कारण उन्हें बार-बार भटकना पड़ता है। इसका सबसे अधिक असर बुजुर्ग और गंभीर मरीजों पर पड़ रहा है। कुछ मरीजों ने आरोप लगाया कि ईसीजी केंद्र पर तैनात कर्मचारी कई बार मरीजों से अभद्र व्यवहार करते हैं और विवाद की स्थिति भी बन जाती है।मरीजों और परिजनों ने आरोप लगाया कि कुछ स्थानों पर अनुभवहीन कर्मचारियों की तैनाती होने से कामकाज प्रभावित हो रहा है। उन्होंने मांग की है कि ईसीजी केंद्र सहित अन्य विभागों में अनुभवी और व्यवहारिक स्टाफ तैनात किया जाए, ताकि मरीजों को समय पर जांच और उपचार मिल सके।

राष्ट्रीय युवा पुरस्कार विजेता अशोक कुमार भारद्वाज ने भी इस मामले को गंभीर बताते हुए स्वास्थ्य विभाग को एक सप्ताह का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने कहा कि यदि कर्मचारियों का व्यवहार नहीं सुधरा और मरीजों को समय पर जांच व उपचार की सुविधा नहीं मिली, तो एक सप्ताह बाद मेडिकल कॉलेज गेट पर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ कर्मचारी अपने परिचितों या जान-पहचान वाले मरीजों को प्राथमिकता देते हैं, जबकि आम मरीजों को घंटों लाइन में खड़ा रहना पड़ता है।

यहां तक कि दिव्यांग और वृद्ध महिलाओं को भी समय पर सहयोग नहीं मिल रहा। कई वृद्ध महिलाओं ने बताया कि वे सुबह 9 बजे से ईसीजी के लिए बैठी रहती हैं, लेकिन दोपहर तक भी उनकी जांच नहीं हो पाती।मरीजों ने मामले को स्वास्थ्य मंत्री और जिला के मुख्य चिकित्सा अधिकारी के संज्ञान में देते हुए मेडिकल कॉलेज की व्यवस्थाओं में सुधार की मांग की है।
