राजेश बिष्ट नए भारत का उदय

12 से 15 मार्च तक चंडीगढ़ में होगा चार दिवसीय रागनी उत्सव
भिवानी। चंडीगढ़ के कलाग्राम मनीमाजरा में संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के आदेशानुसार उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र पटियाला द्वारा 12 से 15 मार्च तक चार दिवसीय रागनी उत्सव का आयोजन किया जाएगा। इस उत्सव में हरियाणा के कई प्रसिद्ध लोक कलाकार अपनी टीमों के साथ रागनियों के माध्यम से हरियाणवी संस्कृति की समृद्ध परंपरा और लोक जीवन की झलक प्रस्तुत करेंगे।
यह जानकारी देते हुए म्हारी संस्कृति म्हारा स्वाभिमान संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष हनुमान कौशिक ने कलाकारों को बधाई देते हुए कहा कि कलाकार समाज की संस्कृति और परंपराओं के सच्चे संवाहक होते हैं। उन्होंने कहा कि एक कलाकार ही युवा पीढ़ी को संस्कारों व संस्कृति से अवगत कराने का कार्य करता है।उन्होंने कहा कि आज के आधुनिक समय में जहां युवा पीढ़ी तेजी से आधुनिकता की ओर बढ़ रही है, वहीं लोक कलाकार अपनी कला के माध्यम से युवाओं को अपनी जड़ों, परंपराओं और सामाजिक मूल्यों से जोड़ने का कार्य कर रहे हैं। रागनी हरियाणा की सांस्कृतिक पहचान है और इसके माध्यम से समाज में सकारात्मक संदेश भी पहुंचता है।
हनुमान कौशिक ने बताया कि इस चार दिवसीय रागनी उत्सव में इंद्रजीत कुंडलिया, जिन्हें संस्कृति रतन अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है, अपनी टीम के साथ प्रस्तुति देंगे। इसके अलावा कप्तान बिसानिया, जिन्हें संस्कृति गौरव अवार्ड प्राप्त है, वे भी अपनी रागनियों से दर्शकों को हरियाणवी संस्कृति से रूबरू करवाएंगे।उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुके कलाकार राकेश भराणिया भी इस कार्यक्रम में अपनी टीम के साथ प्रस्तुति देंगे। इसके साथ ही हरियाणा केसरी सुरेंद्र शर्मा गिगनाऊ भी मंच पर रागनियों की शानदार प्रस्तुति देकर दर्शकों का मनोरंजन करेंगे।
इन कलाकारों की प्रस्तुतियों के माध्यम से हरियाणा की बोली, लोक जीवन, सामाजिक परंपराएं और सांस्कृतिक मूल्यों की झलक देखने को मिलेगी। रागनियों के माध्यम से कलाकार समाज में जागरूकता फैलाने और लोक संस्कृति को जीवित रखने का कार्य कर रहे हैं।हनुमान कौशिक ने कहा कि ऐसे सांस्कृतिक आयोजनों से कलाकारों को मंच मिलता है और युवाओं को अपनी संस्कृति के बारे में जानने और समझने का अवसर मिलता है।
इससे प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान मजबूत होती है और हरियाणा की लोक संस्कृति को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलती है। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील करते हुए कहा कि अधिक से अधिक संख्या में इस रागनी उत्सव में पहुंचकर कलाकारों का उत्साहवर्धन करें और हरियाणवी संस्कृति के इस भव्य आयोजन का आनंद लें।
