राजेश बिष्ट / नए भारत का उदय

घरेलू हिंसा, कार्यस्थल पर उत्पीड़न व नि:शुल्क कानूनी सहायता पर दी गई जानकारी
भिवानी। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर राजकीय महिला महाविद्यालय बवानी खेड़ा में महिलाओं के लिए प्रश्नोत्तर सत्र सहित एक संवादात्मक कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार तथा जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण भिवानी डीआर चालिया के निर्देशानुसार आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य महिलाओं को उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करना तथा न्याय प्राप्ति के लिए उपलब्ध कानूनी व्यवस्थाओं की जानकारी देना था।
कार्यशाला में मुख्य अतिथि के रूप में मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) सह सचिव, जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण पवन कुमार उपस्थित रहे, जबकि कार्यक्रम की मुख्यवक्ता पैनल अधिवक्ता सोनाली तंवर रहीं। सीजेएम पवन कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि महिलाओं को समाज में समान अधिकार प्राप्त हैं और उन्हें अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहना चाहिए। उन्होंने बताया कि जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण द्वारा समाज के कमजोर वर्गों, विशेषकर महिलाओं को नि:शुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध करवाई जाती है, ताकि आर्थिक या सामाजिक कारणों से कोई भी व्यक्ति न्याय से वंचित न रह जाए।
सीजेएम पवन कुमार ने कहा कि अक्सर जानकारी के अभाव में महिलाएं अपने साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ आवाज नहीं उठा पातीं। इसलिए आवश्यक है कि वे अपने अधिकारों और कानूनी प्रक्रियाओं के बारे में जानकारी प्राप्त करें। उन्होंने बताया कि जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण समय-समय पर कानूनी साक्षरता शिविर, जागरूकता कार्यक्रम और कार्यशालाओं का आयोजन करता है, जिनका उद्देश्य आमजन को कानून के प्रति जागरूक करना है।उन्होंने छात्राओं को प्रेरित करते हुए कहा कि शिक्षित महिला ही सशक्त समाज की आधारशिला होती है। जब महिलाएं अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होंगी और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ेंगी, तभी समाज में वास्तविक समानता स्थापित हो सकेगी। उन्होंने छात्राओं से आह्वान किया कि किसी भी प्रकार की कानूनी समस्या आने पर वे जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण से संपर्क करें या नालसा हेल्पलाइन नंबर 15100 पर संपर्क कर नि:शुल्क कानूनी सहायता का लाभ उठाएं।
कार्यक्रम की मुख्य वक्ता पैनल अधिवक्ता सोनाली तंवर ने महिलाओं से जुड़े कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने घरेलू हिंसा अधिनियम और कार्यस्थल पर महिलाओं के उत्पीडऩ की रोकथाम से संबंधित कानूनों को सरल भाषा में समझाया। उन्होंने बताया कि घरेलू हिंसा केवल शारीरिक ही नहीं बल्कि मानसिक, आर्थिक और भावनात्मक उत्पीडऩ भी हो सकता है। ऐसी स्थिति में महिलाएं कानून की सहायता लेकर सुरक्षा, निवास और भरण-पोषण जैसी कानूनी राहत प्राप्त कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि कार्यस्थल पर यौन उत्पीडऩ की शिकायत के लिए प्रत्येक संस्थान में आंतरिक शिकायत समिति का गठन अनिवार्य है और महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहना चाहिए, ताकि वे किसी भी प्रकार के अन्याय के खिलाफ आवाज उठा सकें। इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राध्यापकगण, छात्राएं तथा जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण का स्टाफ उपस्थित रहा।
