हरियाणवी गीतों में बढ़ती अश्लीलता पर रोक लगाने की मांग

राजेश बिष्ट नए भारत का उदय

सेंसर बोर्ड लागू करने को लेकर मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

भिवानी। हरियाणा की संस्कृति, परंपरा और संस्कार प्रदेश की पहचान माने जाते हैं, लेकिन हाल के वर्षों में हरियाणवी गायन और वीडियो गीतों में बढ़ती अश्लीलता को लेकर समाज में चिंता बढ़ती जा रही है। इसी मुद्दे को लेकर मंगलवार को “अपनी संस्कृति अपने संस्कार समिति” के पदाधिकारियों ने भिवानी के अतिरिक्त उपायुक्त के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपते हुए प्रदेश में गायन और फिल्मों के लिए सेंसर बोर्ड लागू करने की मांग की।

समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि हरियाणवी संस्कृति हमेशा से सादगी, मर्यादा और पारिवारिक मूल्यों के लिए जानी जाती रही है। यहां के लोकगीत, रागनियां और सांस्कृतिक कार्यक्रम समाज को अच्छे संस्कार देने का काम करते आए हैं। लेकिन वर्तमान समय में कुछ कलाकारों द्वारा गीतों में अशोभनीय शब्दों और दृश्यों का प्रयोग किया जा रहा है, जिससे संस्कृति की गरिमा को ठेस पहुंच रही है।

समिति के ब्रांड एम्बेसडर व मुख्यमंत्री से सम्मानित इंदर सिंह लांबा, सचिव रामनिवास, हरि भगवान और भीम सिंह ने बताया कि हाल ही में आए “टटीरी” गीत के विवादित बोलों से हरियाणा के संस्कृति प्रेमियों की भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने कहा कि इस गीत में प्रयुक्त शब्दों को लेकर प्रदेशभर में विरोध देखने को मिल रहा है और लोगों में रोष व्याप्त है।

उन्होंने कहा कि कलाकारों की जिम्मेदारी होती है कि वे अपनी कला के माध्यम से समाज को सकारात्मक संदेश दें। लेकिन जब गीतों में अश्लील और आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया जाता है तो इससे समाज में गलत संदेश जाता है और युवाओं पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि हरियाणा की बेटियों का सम्मान प्रदेश की संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

किसी भी गीत या फिल्म में ऐसे शब्दों का प्रयोग नहीं होना चाहिए जिससे महिलाओं के स्वाभिमान को ठेस पहुंचे। हालिया विवाद से प्रदेश की बेटियों के सम्मान को भी ठेस पहुंची है, जो किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है।

ज्ञापन में मांग की गई कि हरियाणा सरकार प्रदेश में बनने वाले गीतों, म्यूजिक वीडियो और फिल्मों के लिए सेंसर बोर्ड को पुनः लागू करे, ताकि किसी भी प्रकार की अश्लील या आपत्तिजनक सामग्री को पहले ही रोका जा सके। इससे हरियाणवी संस्कृति की मर्यादा और सम्मान को बनाए रखने में मदद मिलेगी।

समिति के सदस्यों ने कहा कि यदि इस तरह की व्यवस्था लागू होती है तो कलाकार भी सामाजिक मर्यादाओं का ध्यान रखते हुए रचनाएं प्रस्तुत करेंगे और समाज में सकारात्मक वातावरण बनेगा। उन्होंने हरियाणा की संस्कृति और संस्कारों की रक्षा के लिए सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग की।समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि सरकार उनकी मांग पर गंभीरता से विचार करे और जल्द ही इस दिशा में उचित निर्णय लिया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके और हरियाणवी संस्कृति की गरिमा बनी रहे। इस अवसर पर समिति के कई सदस्य सचिवालय परिसर में उपस्थित रहे।

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