यशवीर सिंह नए भारत का उदय
तोशाम/भिवानी। गांव सिमलीवास में विकास कार्य के नाम पर किसानों के साथ अन्याय और सरकारी धन के दुरुपयोग का एक गंभीर मामला सामने आया है। एक तरफ देश का जवान सीमा पर रक्षा करता है, वहीं दूसरी तरफ सेवानिवृत्त होने के बाद उसे अपने ही हक के लिए सिस्टम के भ्रष्ट तंत्र से लडऩा पड़ रहा है। मामला सिमली माईनर के मोगा नंबर-4200 पर बनाए गए पक्के खाले (नाले) के निर्माण में हुई भारी धांधली और भ्रष्टाचार से जुड़ा है।
शिकायतकर्ता रणधीर सिंह रणवा (फौजी) का आरोप है कि ठेकेदार ने उनकी 3 एकड़ उपजाऊ जमीन के बीचों-बीच जबरन निर्माण किया। रणधीर सिंह ने निर्माण से पहले विभाग और सीएम विंडो पर लिखित आपत्ति दर्ज कराई थी कि खाले को खेत के बीच से न निकालकर किनारे (डोल) के साथ बनाया जाए, जैसा कि पास के अन्य खेतों (6 एकड़ जमीन) में किया गया है।
रणधीर सिंह ने बताया कि मैंने ठेकेदार से विनती की थी कि फसल कटने तक रुक जाएं, लेकिन उन्होंने मेरी खड़ी फसल को बर्बाद कर दिया। निर्माण के बाद बचा हुआ मलबा और मिट्टी भी खेत में ही छोड़ दी गई, जिसे हटाने के लिए मुझे अपने खर्च पर मजदूर और ट्रैक्टर लगाने पड़े। उन्होंने बताया कि यही नहीं उनके मकान के सहारे 6 फुट गहरा खाला खुला छोड़ दिया गया है, जिसके कारण उनके पशुधन को चोट लगने का भय भी बना हुआ है।
रणधीर सिंह अकेले नहीं हैं; गांव की एक अन्य निवासी ने भी सिंचाई विभाग के एक्सईन को लिखित शिकायत दी है। शियत में बताया कि निर्माण में 3 और 4 नंबर की घटिया ईंटों का प्रयोग किया गया, हल्की क्वालिटी की सीमेंट का इस्तेमाल हुआ है, खेतों में पानी के लिए नाके तक नहीं छोड़े गए, जिससे सिंचाई मुश्किल हो गई है, रात के अंधेरे में 12 पुराने और टूटे हुए पाइप दबा दिए गए, ताकि उनकी जांच न हो सके।
हैरानी की बात यह है कि किसान लगातार एसडीओ व एक्सईन को लिखित शिकायतें दे रहे थे और मामला सीएम विंडो पर भी दर्ज था। इसके बावजूद विभाग के अधिकारियों ने भ्रष्टाचार की शिकायतों को दरकिनार करते हुए ठेकेदार की पेमेंट रिलीज कर दी। रणधीर सिंह का सीधा आरोप है कि एसडीओ एक्सईन की मिलीभगत के बिना यह भुगतान संभव नहीं था। सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी पर भी विभाग चुप्पी साधे बैठा है।
