राजेश बिष्ट नए भारत का उदय

भिवानी। हरियाणवी लोक संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन को लेकर चंडीगढ़ के मनीमाजरा स्थित कलाग्राम में आयोजित चार दिवसीय रागनी महोत्सव का समापन भव्य और गरिमामय वातावरण में हुआ। इस सांस्कृतिक आयोजन ने न केवल पारंपरिक हरियाणवी लोक कला को मंच प्रदान किया, बल्कि समाज में फैल रही सांस्कृतिक चुनौतियों पर भी गंभीर मंथन का अवसर दिया।

समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में पंडित लख्मीचंद आश्रम, उमरावत से “म्हारी संस्कृति म्हारा स्वाभिमान” संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष हनुमान कौशिक ने शिरकत की। कार्यक्रम का आयोजन उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, पटियाला के सहयोग से किया गया, जिसमें प्रदेश और देशभर के प्रसिद्ध लोक कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति देकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

इस अवसर पर रागनी गायक सुरेंद्र शर्मा गिगनाऊ, संध्या शर्मा हिसार, अंतरराष्ट्रीय लोक कलाकार एवं हरियाणा अवार्डी राकेश भराणिया सहित अनेक कलाकारों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। कलाकारों ने हरियाणवी लोकगीतों, रागनियों और पारंपरिक प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि हनुमान कौशिक ने कहा कि हरियाणवी संस्कृति अपनी सादगी, मर्यादा और सामाजिक मूल्यों के लिए जानी जाती है, लेकिन वर्तमान समय में कुछ मंचों पर गायन शैली में अभद्रता और फूहड़ता का समावेश चिंता का विषय बनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह प्रवृत्ति न केवल संस्कृति को नुकसान पहुंचाती है, बल्कि युवा पीढ़ी पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
उन्होंने सरकार से मांग करते हुए कहा कि हरियाणा में भी एक सशक्त सेंसर बोर्ड का गठन किया जाना चाहिए, जो सांस्कृतिक कार्यक्रमों और गीत-संगीत की गुणवत्ता की निगरानी करे। इससे अश्लीलता और फूहड़ता पर रोक लगाई जा सकेगी और लोक संस्कृति की गरिमा बनी रहेगी।
हनुमान कौशिक ने कहा कि “म्हारी संस्कृति म्हारा स्वाभिमान” संगठन का मुख्य उद्देश्य हरियाणवी संस्कृति को उसकी मूल पहचान के साथ संरक्षित करना है। उन्होंने कलाकारों से भी आह्वान किया कि वे अपनी प्रस्तुतियों में मर्यादा और सामाजिक मूल्यों का ध्यान रखें, ताकि आने वाली पीढ़ियों को शुद्ध और सकारात्मक सांस्कृतिक विरासत मिल सके।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में संगठन के संस्थापक एवं कोषाध्यक्ष, लेखक मनजीत पहासौरिया, मंच संचालक धर्मबीर नागर, पंजाबी गायक सिमीन्द्र सीमी, मनमोहन सोनी, रामभज शर्मा और विनोद दत्त सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया। सभी अतिथियों ने आयोजन की सराहना करते हुए इसे हरियाणवी संस्कृति के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
महोत्सव के दौरान चार दिनों तक विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आयोजित की गईं, जिनमें लोकगीत, रागनी, नृत्य और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुनों ने वातावरण को सांस्कृतिक रंग में रंग दिया। दर्शकों ने भी पूरे उत्साह के साथ कार्यक्रम का आनंद लिया और कलाकारों का हौसला बढ़ाया।
समापन समारोह के अंत में सभी प्रतिभागी कलाकारों को प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया। आयोजकों ने भविष्य में भी इस प्रकार के सांस्कृतिक आयोजनों को निरंतर जारी रखने का संकल्प लिया, ताकि हरियाणवी संस्कृति को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक पहचान मिल सके।
