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रसोई गैस की किल्लत से हाहाकार : सरकारी दावे फेल, जनता बेहाल : कामरेड राजकुमार बासिया
भिवानी। प्रदेश में रसोई गैस और कमर्शियल सिलेंडरों की भारी किल्लत ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है। एक तरफ सरकार सुचारू आपूर्ति के दावे कर रही है, वहीं दूसरी तरफ धरातल पर उपभोक्ताओं को खाली सिलेंडरों के साथ घंटों कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है। इस गंभीर संकट को लेकर एआईयूटीयूसी ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। एआईयूटीयूसी के जिला सचिव कामरेड राजकुमार बासिया ने कड़े शब्दों में सरकार की प्रशासनिक विफलता की आलोचना की है।

उन्होंने कहा कि आज शहर हो या गांव, हर परिवार पूरी तरह से गैस पर निर्भर है। सिलेंडरों की अनुपलब्धता ने घरों का चूल्हा ठंडा कर दिया है। उन्होंने कहा कि रेहड़ी-पटरी और खोमचे वाले जो रोज कमाते और रोज खाते हैं, उनकी आजीविका ठप्प होने के कगार पर है। कमर्शियल सिलेंडर न मिलने से छोटे दुकानदारों के सामने परिवार पालने का संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में शादियों और सामाजिक आयोजनों का सीजन चल रहा है। ऐसे में कमर्शियल सिलेंडरों की कमी ने आयोजकों और कैटरर्स की रातों की नींद उड़ा दी है।
कॉमरेड राजकुमार बासिया के अनुसार रसूखदार लोग तो ऊंचे दामों पर या चोर रास्तों (ब्लैक मार्केटिंग) से सिलेंडर हासिल कर रहे हैं, लेकिन गरीब और मध्यम वर्गीय परिवार पिस रहा है। उन्होंने ने प्रशासनिक मिलीभगत का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यह संकट प्राकृतिक नहीं बल्कि ‘मानव निर्मित’ है। एजेंसियों और बिचौलियों के गठजोड़ से सिलेंडरों को डंप किया जा रहा है ताकि उन्हें ऊंचे दामों पर कालाबाजारी में बेचा जा सके। प्रशासन यह स्पष्ट नहीं कर रहा है कि आपूर्ति में बाधा कहाँ है। नागरिकों को अंधेरे में रखा जा रहा है। यही नहीं उज्ज्वला योजना जैसी स्कीमों का ढोल पीटने वाली सरकार आज एक बुनियादी सिलेंडर उपलब्ध कराने में नाकाम रही, जो कि सरकार की सबसे बड़ी विफलता है।
एआईयूटीयूसी ने सरकार को चेतावनी देते हुए निम्नलिखित मांगें रखी हैं कि घरेलू और कमर्शियल सिलेंडरों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, संकट की आड़ में कालाबाजारी करने वाले डीलरों और बिचौलियों पर रासुका या सख्त कानूनी कार्रवाई हो तथा सरकार और खाद्य आपूर्ति विभाग स्थिति को स्पष्ट करें कि आखिर यह किल्लत क्यों हुई और इसे कब तक दूर किया जाएगा। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही गैस सिलेंडरों की किल्लत दूर नहीं हुई, तो एआईयूटीयूसी बड़ेे स्तर पर आंदोलन करने पर मजबूर होगी।
