जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की कार्यशाला हुई आयोजित

राजेश बिष्ट नए भारत का उदय

डीएलएसए ने विभिन्न कानूनी योजनाओं पर दी जानकारी

भिवानी। जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण भिवानी द्वारा आमजन तक कानूनी सेवाओं की प्रभावी पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया। प्राधिकरण के चेयरमैन एवं जिला एवं सत्र न्यायाधीश डीआर चालिया के निर्देशानुसार यह कार्यशाला लघु सचिवालय स्थित एडीआर सेंटर के कॉन्फ्रेंस हॉल में संपन्न हुई। कार्यशाला की अध्यक्षता सीजेएम-कम-सचिव पवन कुमार ने की। कार्यशाला में पैनल अधिवक्ताओं, मध्यस्थ अधिवक्ताओं तथा नवनियुक्त पैरालीगल वालंटियर्स ने भाग लिया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीजेएम पवन कुमार ने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाओं का मुख्य उद्देश्य विधिक सेवाओं को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि योजनाओं की सही जानकारी होने से ही कार्यकर्ता जरूरतमंद लोगों को प्रभावी सहायता प्रदान कर सकते हैं। इस वर्ष की आयोजित होनी वाली दूसरी राष्ट्रीय लोक अदालत 9 मई 2026 में अधिक से अधिक केसो को राष्ट्रीय लोक अदालत मे लाकर उनका निदान करवाया जाए।कार्यशाला के दौरान चीफ लीगल एड डिफेंस काउंसिल राधेश्याम ने लीगल सर्विसेज टू पर्सन्स विद इंटेलेक्चुअल डिसबिलिटीज स्कीम, 2024 विषय पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह योजना विशेष रूप से बौद्धिक दिव्यांग व्यक्तियों को नि:शुल्क और सुलभ कानूनी सहायता प्रदान करने के लिए बनाई गई है, जिससे वे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो सकें और न्याय प्राप्त कर सकें।

वहीं डिप्टी चीफ लीगल एड डिफेंस काउंसिल अधिवक्ता बबली ने नालसा (आशा—अवेयरनेस, सपोर्ट, हेल्प एंड एक्शन) स्कीम 2025 के अंतर्गत बाल विवाह उन्मूलन पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करने के लिए जागरूकता अभियान बेहद जरूरी हैं। इसके साथ ही उन्होंने नालसा की ड्रग अवेयरनेस एंड वेलनेस नेविगेशन फॉर ए ड्रग-फ्री इंडिया स्कीम 2025 पर भी चर्चा करते हुए नशा मुक्त समाज के निर्माण का आह्वान किया।

अधिवक्ता शीला तंवर ने मीडिएशन फॉर द नेशन 2.0 तथा हरियाणा कम्युनिटी मेडिएशन प्रोग्राम के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि मध्यस्थता के माध्यम से विवादों का समाधान आपसी सहमति से सरल और शीघ्र तरीके से किया जा सकता है। इससे न्यायालयों पर मामलों का बोझ भी कम होता है और लोगों को त्वरित न्याय मिलता है।कार्यशाला में उपस्थित सभी पैनल अधिवक्ताओं, मध्यस्थ अधिवक्ताओं एवं नवनियुक्त पैरालीगल वालंटियर्स ने सक्रिय भागीदारी निभाई।

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