राजेश बिष्ट नए भारत का उदय
⏩ वैश्विक शांति युद्ध और अशांति के इस दौर में दुनिया भर में अमन-चैन के लिए विशेष प्रार्थना की गई
⏩ सामंजस्य और भाईचारा समाज के विभिन्न वर्गों के बीच आपसी प्रेम और सद्भाव बढ़ाने का संकल्प लिया गया
⏩ मानव कल्याण सर्वे भवन्तु सुखिनः के भाव के साथ विश्व के हर प्राणी के स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना की गई
भिवानी। भिवानी स्थानीय कोंट रोड स्थित प्रतिष्ठित डी.ए.वी. शताब्दी पब्लिक स्कूल में चल रही विशेष यज्ञ श्रृंखला के दूसरे दिन आज अभिभावक-शिक्षक-छात्र बैठक पर एक आध्यात्मिक और भव्य समारोह का आयोजन किया गया। विद्यालय के प्रांगण में आहुति की सुगंध और वैदिक मंत्रों की गूँज ने न केवल छात्रों बल्कि उपस्थित अभिभावकों को भी आत्मिक शांति का अनुभव कराया। इस यज्ञ की सबसे बड़ी विशेषता छात्रों के माता-पिता की सक्रिय भागीदारी रही। विद्यालय प्रबंधन की इस अनूठी पहल के अंतर्गत आज के द्वितीय यज्ञ में मुख्य यजमान के रूप में विद्यार्थियों के अभिभावकों को आमंत्रित किया गया था।

प्रातः काल से ही अभिभावक पारंपरिक वेशभूषा में विद्यालय पहुँचने लगे, जिससे पूरे परिसर में उत्सव और पवित्रता का माहौल बन गया। यज्ञ के दौरान पुरोहितों द्वारा उच्चारित विश्वानी देव सवितर्दुरितानी परासुव जैसे मंत्रों के साथ उपस्थित जनसमूह ने घी और सामग्री की आहुतियां समर्पित कीं। इस अनुष्ठान का मुख्य उद्देश्य संकुचित स्वार्थों से ऊपर उठकर वसुधैव कुटुंबकम की भावना को चरितार्थ करना था। इस पावन अवसर पर पद्मश्री डॉ. पूनम सूरी ने अपना शुभकामना संदेश प्रेषित करते हुए कहा डी.ए.वी. का मूल मंत्र ही विश्व का कल्याण है।
विद्यालय की प्रधानाचार्या जगदीप कौर ने इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि बच्चों को अपनी जड़ों और संस्कृति से जोड़ना भी है। उन्होंने इस पवित्र एकजुटता पर हर्ष व्यक्त करते हुए कहा आज जब अभिभावक और शिक्षक एक साथ अग्नि के समक्ष बैठते हैं, तो वह दृश्य बच्चों के मानस पटल पर सकारात्मकता और अनुशासन की एक गहरी छाप छोड़ता है। हम इस सहभागिता के लिए सभी माता-पिता के हृदय से आभारी हैं। यज्ञ न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि इसके वैज्ञानिक लाभों पर भी प्रकाश डाला गया।
विद्यालय के मिडिया प्रभारी राजेश कुमार मुखी ने बताया कि यज्ञ में प्रयुक्त होने वाली जड़ी-बूटियाँ और शुद्ध घी के दहन से वायुमंडल का शुद्धिकरण होता है और पर्यावरण में मौजूद हानिकारक जीवाणु नष्ट होते हैं। यज्ञ की पूर्णाहुति के पश्चात सभी उपस्थित जनों को ऋषि प्रसाद वितरित किया गया। अभिभावकों ने विद्यालय की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से बच्चों में नैतिक मूल्यों का विकास होता है और वे भारतीय परंपराओं के प्रति गौरवान्वित महसूस करते हैं।
विद्यालय की प्रधानाचार्या जगदीप कौर ने घोषणा की है कि यह श्रृंखला अभी जारी रहेगी, जिसमें समाज के विभिन्न वर्गों और छात्रों के अन्य समूहों को जोड़ा जाएगा ताकि शांति और समृद्धि का यह संदेश जन-जन तक पहुँचे।
