सवा लाख से एक लड़ाऊँ चिड़ियों सों मैं बाज तड़ऊं तबे गोबिंदसिंह नाम कहाऊं 

राजेश बिष्ट / नए भारत का उदय 

खालसा पंथ सर्जना दिवस श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया, 

वाहो वाहो गोबिंद सिंह आपे गुर चेला,

आपे ही सब किछु जानै,

आपे देइ वडिआईआ

भिवानी। पुरानी देवसर चुंगी स्थित गुरुद्वारा सिंह सभा की संगत द्वारा खालसा पंथ सर्जना दिवस के उपलक्ष में बड़ी श्रद्धा एवं उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर गुरुद्वारा परिसर में श्री सुखमनी साहिब के पाठ के भोग डाले गए तथा शब्द-कीर्तन के उपरांत लंगर वितरित किया गया। कार्यक्रम के दौरान नगर परिषद चेयरमैन प्रतिनिधि भवानी प्रताप सिंह एवं भिवानी विधायक घनश्याम सर्राफ के पुत्र अमन सर्राफ ने गुरुद्वारा पहुंचकर शीश नवाया और अरदास की। गुरुद्वारा कमेटी की ओर से उन्हें सिरोपा भेंट कर सम्मानित किया गया।

इस मौके पर ग्रंथी ज्ञानी प्रेम सिंह ने संगत को संबोधित करते हुए बताया कि बैसाखी के पावन दिन श्री आनंदपुर साहिब में गुरु गोविंद सिंह जी ने 1699 में खालसा पंथ की स्थापना कर एक नई क्रांतिकारी सोच को जन्म दिया था। उन्होंने कहा कि सिख इतिहास त्याग, बलिदान और धर्म की रक्षा के लिए समर्पण का प्रतीक रहा है। उन्होंने बताया कि सिख पंथ की नींव गुरु नानक देव जी ने रखी थी, जिन्होंने मानवता, समानता और भाईचारे का संदेश दिया। इसके बाद गुरु परंपरा में आगे बढ़ते हुए गुरु अर्जन देव जी ने शहादत देकर धर्म की रक्षा का उदाहरण प्रस्तुत किया और गुरु तेग बहादुर जी ने कश्मीरी पंडितों की रक्षा के लिए अपना बलिदान दिया।

ज्ञानी प्रेम सिंह ने बताया कि गुरु गोविंद सिंह जी ने संगत से पांच सिरों की मांग कर पांच सिखों को अमृतपान करवाया और ‘पांच प्यारों’ की उपाधि दी। इनमें भाई दया सिंह, भाई धर्म सिंह, भाई मोहकम सिंह, भाई साहिब सिंह और भाई हिम्मत सिंह शामिल थे। उन्होंने बताया कि गुरु गोविंद सिंह जी का बचपन का नाम गोबिंद राय था। बाद में इन पांच प्यारो से अमृतपान कर स्वयं भी गुर के सिख सज गए और गोबिंद राय से गोबिंद सिंह बन गए। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि “सवा लाख से एक लड़ाऊँ चिड़ियों सों मैं बाज तड़ऊं तबे गोबिंदसिंह नाम कहाऊं।”   

गुरु जी ने सिखों को पांच ककार—केश, कड़ा, कृपाण, कंघा और कच्छा—धारण करने का संदेश दिया। साथ ही पुरुषों को ‘सिंह’ और महिलाओं को ‘कौर’ उपनाम देने की परंपरा शुरू की, जिससे समानता और आत्मसम्मान की भावना को बढ़ावा मिला। इस अवसर पर पुरानी देवसर चुंगी स्थित गुरुद्वारा सिंह सभा प्रधान प्रेम मुटरेजा, इंद्रमोहन सिंह प्रधान, मुख्य गुरद्वारा घंटा घर, बलदेव सिंह, गुलशन चानना, सुदेश सिंह, गगनीश चावला, विजय सनेजा, बलविंदर सिंह मिंटू, करनेल सिंह बागड़ी, गुरशरण सिंह, महेंद्र सिंह, खरेतीलाल बत्रा, रामप्रकाश मक्कड़, विशाल मुटरेजा, जतिन चावला, रमन बागड़ी, पूजा कौर, आराध्य, सुमन चावला और नवदीप कौर सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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