राजेश बिष्ट नए भारत का उदय
बिजली-पानी, भोजन और पुनर्वास की मांग तेज, उपायुक्त ने डीएमसी को दिए आगामी कार्रवाई के निर्देश
भिवानी। कस्बा बवानीखेड़ा में गरीब मजदूर, किसान और पशुपालक परिवारों के टूटे आशियानों को लेकर जनआक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। वर्षों से मेहनत-मजदूरी और पशुपालन कर जीवनयापन करने वाले परिवार आज खुले आसमान के नीचे दिन-रात बिताने को मजबूर हैं। भीषण गर्मी के बीच महिलाएं, छोटे बच्चे और बुजुर्ग बेहद कठिन परिस्थितियों में जीवन गुजार रहे हैं। सिर छिपाने के लिए लगाए गए तंबू तक हटाए जाने के बाद अब कई परिवार काबली किकर के पेड़ के नीचे दिन-रात काटने को मजबूर हैं।

लोगों में सबसे ज्यादा नाराजगी इस बात को लेकर है कि गरीबों के टूटे आशियानों पर इतनी सख्ती दिखाने वाला प्रशासन बड़े रसूखदारों के अवैध कब्जों पर कार्रवाई क्यों नहीं करता। स्थानीय लोगों का कहना है कि नगरपालिका ने गरीब परिवारों को तो उजाड़ दिया, लेकिन अब तक उनके पुनर्वास, बिजली-पानी और भोजन जैसी मूलभूत सुविधाओं की कोई व्यवस्था नहीं की गई। इसी मुद्दे को लेकर हरियाणा जागृति मोर्चा के प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त से मुलाकात कर पीडि़त परिवारों के लिए तुरंत राहत उपलब्ध करवाने की मांग उठाई। जिस पर उपायुक्त भिवानी ने डीएमसी को आगामी आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
सामाजिक कार्यकर्ता उमेश भारद्वाज, पूर्व पार्षद मीना चौपड़ा, जिला पार्षद रेणू बाला और कामरेड राजेश कुगड़ ने संयुक्त बयान जारी करते हुए कहा कि गरीब परिवारों को बिना वैकल्पिक व्यवस्था के बेघर करना पूरी तरह अमानवीय और संवेदनहीन कदम है। उन्होंने कहा कि प्रशासन को तुरंत पीड़ित परिवारों के लिए बिजली, पानी, भोजन और अस्थायी रहने की व्यवस्था करनी चाहिए तथा जल्द स्थायी पुनर्वास सुनिश्चित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह केवल मकानों का नहीं बल्कि गरीब परिवारों के सम्मान, सुरक्षा और अस्तित्व का सवाल है।
वहीं भीम आर्मी नेता संतलाल अंबेडकर, कॉमरेड राजेश, मंजीत लांगायन, एडवोकेट राजेश सिंधु और एडवोकेट रामकिशन काजल ने भी संयुक्त बयान जारी कर प्रशासन और सरकार की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जिन बच्चों के हाथों में किताबें होनी चाहिए थीं, वे आज अपने टूटे हुए घरों का मलबा समेटने को मजबूर हैं। महिलाओं की आंखों में आंसू और बुजुर्गों की बेबसी सरकार की संवेदनहीनता को उजागर कर रही है। नेताओं ने कहा कि गरीब और मजदूर वर्ग के साथ हो रहा यह व्यवहार लोकतंत्र और मानवता दोनों के खिलाफ है।
धरने पर मौजूद सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने संयुक्त रूप से मांग की कि पीड़ित परिवारों के लिए तुरंत राहत सामग्री, पीने का पानी, बिजली और रहने की व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए। साथ ही चेतावनी दी गई कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो सामाजिक, युवा, किसान, मजदूर और दलित संगठन मिलकर बड़ा जनआंदोलन खड़ा करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और सरकार की होगी।
नेताओं ने स्थानीय विधायक की चुप्पी पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जब गरीब परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं, तब जनता अपने जनप्रतिनिधियों से जवाब मांग रही है। लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन और सरकार ने जल्द संवेदनशीलता नहीं दिखाई तो आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज होगा।
