रेणू भाटिया का इस्तीफा जल्दबाजी का फैसला, उनकी मंशा हमेशा महिला हित की रही : सुरेश अरोड़ा

राजेश बिष्ट नए भारत का उदय

⏩ शब्द उत्तेजानापूर्ण हो सकते हैं, लेकिन भावना पूरी तरह सही थी : सुरेश अरोड़ा

भिवानी। हरियाणा महिला आयोग की चेयरपर्सन रेणू भाटिया के इस्तीफे को लेकर सामाजिक और सामाजिक-राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। इस पूरे घटनाक्रम पर अरोड़ा विकास मंच ने अपनी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए रेणू भाटिया के इस्तीफे को गलत बताया है और पुरजोर तरीके से उनका समर्थन किया है।

अरोड़ विकास मंच के नेशनल विस्तारक सुरेश अरोड़ा का कहना है कि रेणू भाटिया का पूरा कार्यकाल महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए समर्पित रहा है, ऐसे में उनके एक बयान को आधार बनाकर इस तरह का मोड़ देना न्याय संगत नहीं है। अरोड़ा विकास मंच के नेशनल विस्तारक सुरेश अरोड़ा ने इस मामले पर खुलकर रेणू भाटिया के पक्ष में स्टैंड लिया है। उन्होंने कहा कि रेणू भाटिया ने हमेशा महिला हित में कार्य किया है। उनके इस्तीफे की जो परिस्थितियां बनीं, वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण हैं। हालिया घटनाक्रम में उनका गुस्सा दरअसल एक मासूम नाबालिग बच्ची के साथ हुई ज्यादती और क्रूरता के खिलाफ था। एक संवेदनशील पद पर बैठी महिला होने के नाते पीडि़ता का दर्द देखकर उनका विचलित होना स्वाभाविक था। संभव है कि उस वक्त आक्रोश में आकर रेणू भाटिया ने जो शब्द कहे, वे उत्तेजनापूर्ण हो सकते हैं, लेकिन उनकी मंशा और भावना पर कतई सवाल नहीं उठाया जा सकता।

सुरेश अरोड़ा ने स्पष्ट किया कि रेणू भाटिया का उद्देश्य कभी भी किसी की व्यक्तिगत या सामाजिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का नहीं था। उनका पूरा ध्यान केवल उस दरिंदगी के खिलाफ आवाज बुलंद करने और दोषी को सजा दिलाने पर केंद्रित था। अरोड़ा विकास मंच ने रेणू भाटिया के कार्यकाल की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने राज्य महिला आयोग की चेयरपर्सन के तौर पर एक नई मिसाल कायम की थी।

सुरेश अरोड़ा ने कहा कि आज तक इतिहास गवाह है कि जब भी प्रदेश में किसी महिला या बेटी के खिलाफ अन्याय हुआ, रेणू भाटिया ने बिना किसी राजनीतिक या सामाजिक दबाव के सबसे पहले आवाज उठाई। वे सिर्फ दफ्तरों में बैठने वाली चेयरपर्सन नहीं थीं, बल्कि उन्होंने जमीनी स्तर पर जाकर अनगिनत पीडि़तों के पक्ष में खड़े होकर उन्हें न्याय दिलाने का काम किया। महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए उनका आक्रामक रुख अपराधियों में खौफ पैदा करने वाला था। मंच के नेशनल विस्तारक ने समाज और व्यवस्था से अपील की है कि किसी भी व्यक्ति के योगदान का मूल्यांकन केवल एक घटना या कुछ शब्दों के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए।

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