बोधिवृक्ष के नीचे संतों-बौद्ध भिक्षुओं से संवाद, कहा “बुद्ध प्रकाश हैं, उनकी ज्योति जीवन को आलोकित करे”

राजेश बिष्ट नए भारत का उदय

बोधगया। विश्व प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु एवं ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु ने सोमवार को पवित्र पूर्णिमा के शुभ अवसर पर भगवान बुद्ध की ज्ञानस्थली एवं यूनेस्को विश्व धरोहर महाबोधि महाविहार का श्रद्धापूर्वक दर्शन किया। इस दौरान उन्होंने भगवान बुद्ध के प्रति गहरी आस्था व्यक्त करते हुए पूजा-अर्चना की तथा विश्व शांति, करुणा और मानव कल्याण का संदेश दिया।

महाबोधि मंदिर पहुंचने पर सद्गुरु का स्वागत मुख्य भिक्षु वेनेरेबल भिक्षु चालिंदा, भंते डॉ. मनोज, बोधगया मंदिर प्रबंधन समिति (बीटीएमसी) की सचिव डॉ. महाश्वेता महारथी एवं सदस्य डॉ. अरविंद सिंह ने किया।इसके बाद सद्गुरु मुख्य गर्भगृह पहुंचे, जहां उन्होंने भगवान बुद्ध को पुष्प अर्पित किए, दीप एवं धूप प्रज्वलित कर श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस अवसर पर मंदिर के भिक्षुओं ने पवित्र बौद्ध सुत्तों का सामूहिक पाठ कर वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत कर दिया।

दर्शन के उपरांत पवित्र बोधिवृक्ष के नीचे भिक्षुओं, लामा, बौद्ध भिक्षुणियों तथा जापानी बौद्ध प्रतिनिधियों के साथ एक विशेष संवाद आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ बीटीएमसी सदस्य किरण लामा के स्वागत भाषण से हुआ। उन्होंने सद्गुरु का स्वागत करते हुए उनकी उपस्थिति को बौद्ध समुदाय के लिए गौरवपूर्ण बताया।संवाद के दौरान शांति, करुणा, सद्भाव, आत्मकल्याण, पर्यावरण संरक्षण और मानव मूल्यों जैसे सार्वभौमिक विषयों पर विचार साझा किए गए। बौद्ध भिक्षु समुदाय ने सद्गुरु के वैश्विक स्तर पर आंतरिक जागरूकता, पर्यावरण संरक्षण और मानवीय मूल्यों के प्रसार में किए जा रहे योगदान की सराहना की।

महाबोधि मंदिर के आगंतुक पंजी में अपने संदेश में सद्गुरु ने लिखा “बुद्ध प्रकाश हैं। प्रकाश पूजा के लिए नहीं, बल्कि उसे आत्मसात करने के लिए है। उनकी ज्योति आपके अस्तित्व को आलोकित करे। प्रेम एवं आशीर्वाद।”इसके पश्चात गया के जिलाधिकारी सह बीटीएमसी अध्यक्ष शशांक शुभंकर, मुख्य भिक्षुओं, बीटीएमसी की सचिव एवं सदस्यों द्वारा सद्गुरु को महाबोधि मंदिर की प्रतिकृति तथा समिति के महत्वपूर्ण प्रकाशन स्मृति-चिह्न स्वरूप भेंट किए गए।सद्गुरु की यह आध्यात्मिक यात्रा सौहार्द, सद्भाव और आध्यात्मिक एकता के वातावरण में संपन्न हुई तथा भगवान बुद्ध के शाश्वत संदेश-ज्ञान, करुणा और वैश्विक सद्भाव-को पुनः सशक्त रूप से प्रतिध्वनित किया।

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