राजेश बिष्ट नए भारत का उदय
भिवानी। नई शिक्षक स्थानांतरण नीति में कुल 120 अंकों में शिक्षको को आयु के वर्षो के आधे अंक अधिकतम 30 तथा वर्तमान पद के अनुभव को अधिकतम 30 अंक दिए गए हैं। यदि एक शिक्षक 20 से 25 वर्ष की सेवा उपरान्त पदोन्नत हुआ है और उसे पदोन्नत हुए केवल कुछ महीने ही हुए हैं तो उसके अनुभव को शून्य माना जाएगा। यह सरासर अनुच्छेद 14 समानता के अधिकार का उल्लंघन है। नई नीति में पदोन्नति शिक्षकों के लिए एक अभिशाप बन गई है। अनुभवी शिक्षकों के सिर पर उम्र के इस पड़ाव मे दूर-दराज के क्षेत्र मे स्थानांतरण का खतरा मंडराने लग गया है।

पिछली स्थानांतरण नीति के खिलाफ जब शिक्षकों ने माननीय उच्च न्यायालय की शरण ली थी तो न्यायालय ने सरकार को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा था कि सरकार शिक्षकों द्वारा उठाए गए मुद्दों पर विचार करें तथा ऐसे मानकों के अनुरूप एक उपयुक्त नीति बनाए जो प्रासंगिक हो। सरकार ने समस्या का हल करने की बजाए अब नई नीति को बिना शिक्षक एवं शिक्षक संगठनों से सलाह किए और भी पेचीदा एवं अव्यवहारिक बना दिया है। शिक्षकों को अब लगने लगा है कि सरकार जानबूझ कर ऐसा करती है ताकि उसे कोई बहाना मिल जाए और तबादले न करने पड़ें। जेबीटी शिक्षक पिछले 10 वर्षों से तबादलों का इंतजार करते-करते सेवानिवृत्त होते जा रहे हैं।
शिक्षको का आरोप है कि सरकार की इस नीति के खिलाफ अब फिर से उन्हे न्यायालय की शरण लेनी पड़ेगी जिसमें समय और धन की बर्बादी होगी तथा मानसिक प्रताडना भी सहन करनी पड़ेगी। इस पर विचार विमर्श करने के लिए भिवानी जिले के शिक्षकों ने नेहरु पार्क मे एक बैठक का आयोजन किया जिसमे सर्वसम्मति से फैसला किया गया गया कि जल्द से जल्द अच्छे वकीलों से सलाह करके न्यायालय की शरण ली जाएं तथा साथ-साथ सता पक्ष एवं विपक्ष से मिलकर समस्याओं का समाधान करवाने के प्रयास किए जाएं। इस अवसर पर लक्ष्मण गौड, विकास शर्मा, राजेश नागर, विनोद परमार, शिवकुमार शास्त्री, शिवकुमार, रमेश, पालाराम, रविन्द्र, नरेन्द्र, सुरेन्द्र, मुकेश, नवरतन, राजपाल, मनोज, योगेश, जगदीश आदि सहित कई शिक्षक उपस्थित थे।
